Rail News: पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर रेल मंडल अंतर्गत लगातार बेहतर राजस्व देने वाले कोईलवर रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है. बुधवार दोपहर हुई मूसलाधार बारिश ने स्टेशन की बदहाल व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी. प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त शेड का अभाव होने के कारण ट्रेन पकड़ने पहुंचे यात्रियों को खुले आसमान के नीचे मूसलाधार बारिश में भीगते हुए बोगियों तक पहुंचना पड़ा. प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त शेड नहीं होने के कारण महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और सामान लेकर पहुंचे यात्री सबसे अधिक परेशान दिखे.
बारिश में भींग कर ट्रेन पकड़ना बना मजबूरी
बुधवार की दोपहर हुई मूसलाधार बारिश के दौरान जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची, यात्रियों में ट्रेन पकड़ने की होड़ मच गयी. प्लेटफॉर्म के टूटे फूटे शेड में किसी तरह खुद को बारिश से बचा रहे लोगों को शेड से ट्रेन तक पहुंचने के लिए खुले में बारिश के बीच से गुजरना पड़ा. कई यात्रियों ने छाता और कपड़े से खुद को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज बारिश के कारण वे पूरी तरह भींग गये. ट्रेन के दरवाजे पर भी यात्रियों की भीड़ लगी रही. ऐसे में फिसलन और भीड़ के बीच हादसे की आशंका भी बनी रही.
राजस्व देने में पीछे नहीं, सुविधा देने में क्यों?
कोईलवर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री विभिन्न दिशाओं में आवागमन करते हैं. अनारक्षित टिकट बिक्री और अन्य माध्यमों से रेलवे को इस स्टेशन से नियमित रूप से राजस्व प्राप्त होता है. इसके बावजूद यात्रियों को बारिश और धूप से बचाने के लिए पर्याप्त शेड तक उपलब्ध नहीं है. यात्रियों का सवाल है कि जब स्टेशन रेलवे की आय में अपना योगदान दे रहा है, तो उसके अनुरूप यहां यात्री सुविधाओं का विस्तार क्यों नहीं किया जा रहा है.
बता दें कि कोईलवर रेलवे स्टेशन पर टिकट बिक्री से प्रतिमाह अनुमानतः चार लाख रुपये की राजस्व प्राप्ति होती है.2026 की पहली छमाही में कोईलवर स्टेशन से तकरीबन 25 लाख रुपये राजस्व के रूप में प्राप्त हुए हैं. फिर भी यात्री सुविधा के नाम पर रेलवे कोईलवर स्टेशन को ठेंगा दिखाता आ रहा है.
महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी
बारिश के दौरान सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को हुई. सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी पानी में चलकर ट्रेन तक पहुंचना पड़ा. प्लेटफॉर्म पर बारिश के पानी से बचने का कोई उपाय न होने से स्थिति और मुश्किल हो गयी. यात्रियों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्टेशन पर पर्याप्त शेड, बेहतर जलनिकासी और प्लेटफॉर्म से ट्रेन तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था जरूरी है.
बढ़ते यात्री दबाव के बावजूद सुविधाएं सीमित
कोईलवर स्टेशन का महत्व लगातार बढ़ रहा है. आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बड़ी संख्या में लोग रोजाना रेल सेवा पर निर्भर हैं. आरा और पटना सहित अन्य स्थानों पर आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या भी कम नहीं है. इसके बावजूद स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अपेक्षित विस्तार नहीं होना रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है.
बता दें कि बिहार के इकलौते मानसिक अस्पताल बिमहास आने वाले मरीजो,कोईलवर स्थित रैपिड एक्शन फोर्स के मुख्यालय में कार्यरत केंद्रीय बल के कर्मी,गीधा और बिहटा के सिकंदरपुर औधीगीक क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों से लेकर, सिकंदरपुर औधोगिक क्षेत्र में अवस्थित कई शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक, छात्र और शिक्षकेत्तर कर्मी भी यहीं से ट्रेन पकड़ते हैं. इसके अलावे निकटतम प्रखंड बड़हरा और संदेश से लेकर सारण और पटना जिले के हजारों यात्री भी कोईलवर स्टेशन से हीं सफर करते हैं.
यात्रियों ने की सुविधाएं बढ़ाने की मांग
स्थानीय यात्रियों ने रेलवे के वरीय अधिकारियों से स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त शेड का निर्माण कराने, जलजमाव की समस्या दूर करने, बेहतर जलनिकासी की व्यवस्था करने और यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.यात्रियों का कहना है कि रेलवे को राजस्व देने वाले स्टेशन पर यात्रियों को बारिश में भींगकर ट्रेन पकड़ने की मजबूरी खत्म होनी चाहिए। केवल ट्रेनों का ठहराव ही पर्याप्त नहीं, यात्रियों को सम्मानजनक और सुरक्षित यात्रा के लिए बुनियादी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए.
