Arrah ganga erosion: गंगा नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट के साथ ही शाहपुर प्रखंड क्षेत्र के गंगा किनारे स्थित जवइनिया में कटाव की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का दावा है कि करीब 52 करोड़ रुपये की लागत से कराये गये बोल्डर पिचिंग कार्य के आसपास बुधवार की रात से जमीन धंसने की स्थिति बनी हुई है. ग्रामीणों के अनुसार, बोल्डर पिचिंग वाले स्थान पर अचानक पानी में बड़े-बड़े बुलबुले उठने लगे और देखते ही देखते करीब 30 से 40 फीट जमीन धंस गयी. स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद ही बचाव कार्य शुरू कर दिया है. नाव के माध्यम से प्रभावित स्थल तक सैकड़ों सैंडबैग पहुंचाकर डाले जा रहे हैं.
पानी में लगातार उठ रहे बुलबुले
पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सुभाष चंद्र और दिनेश यादव ने बताया कि बुधवार की रात से देवमुनि यादव के घर के सामने पानी में लगातार बड़े-बड़े बुलबुले उठ रहे हैं. इसके बाद जमीन धंसने की स्थिति सामने आयी.
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन धंसने के बाद यदि कटाव बढ़ता है, तो बोल्डर पिचिंग के आसपास का हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है. इसी आशंका को देखते हुए ग्रामीण तत्काल अपने स्तर से बचाव कार्य में जुट गये हैं.
नाव से पहुंचाये जा रहे सैंडबैग
ग्रामीण प्रभावित स्थल तक नाव के माध्यम से सैकड़ों सैंडबैग पहुंचाकर डाल रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो तटवर्ती क्षेत्र में परेशानी बढ़ सकती है.
ग्रामीणों ने विभाग से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई करने की मांग की है.
बाढ़ के दौरान भी बना हुआ था कटाव का डर
गौरतलब है कि गंगा में आयी प्रलयंकारी बाढ़ के दौरान भी जवइनिया क्षेत्र में कटाव को लेकर ग्रामीणों में भय बना हुआ था. अब गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद नदी की धारा में बदलाव और पानी के दबाव के कारण तटवर्ती इलाकों में जमीन धंसने की घटनाओं को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं.
विभाग ने कटाव से किया इनकार
इधर, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल बक्सर के कार्यपालक अभियंता कन्हैया सिंह ने क्षेत्र में किसी तरह के कटाव से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को जो दिखाई दे रहा है, वह कटाव नहीं है.
हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर लगातार बुलबुले उठ रहे हैं और जमीन धंसने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और जरूरत के अनुसार बचाव कार्य कराने की मांग की है.
