भोजपुर निष्ठा और बलिदान की धरती है : डॉ शशि

कार्यक्रम के बाद की गयी जन सभा

आरा.

राष्ट्रीय कुंवर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल सिंह शक्रवार की अध्यक्षता में ऐतिहासिक कुंवर सिंह मैदान में 168वीं बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव धूमधाम से समारोह पूर्वक बैंड बाजा, हाथी, ऊंट, घोड़ा के साथ मनाया गया. सर्वप्रथम, कुंवर सिंह पार्क में निर्मल सिंह शक्रवार के नेतृत्व में कुंवर सिंह की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया.

जहां पूर्व प्राचार्य प्रो गांधीजी राय एवं राष्ट्रीय कुंवर सेना के राजगुरु शशि बाबा ने संयुक्त रूप से झंडा दिखाकर जुलूस का नेतृत्व राष्ट्रीय कुंवर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल सिंह शक्रवार, प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह तोमर, उपाध्यक्ष डॉ रघुवर प्रसाद चंद्रवंशी, धर्म योद्धा एसपी सिंह, मृत्युंजय भारद्वाज, बरमेश्वर सिंह बेहरा, ठाकुर संजय सिंह, विश्वजीत कुमार सिंह, महंत सिंह मुखिया, रामकुमार सिंह, अशोक सिंह, अवधेश पांडेय, क्षत्रिय संत रणजी सिंह, कन्हैया सिंह महाप्रभु, डॉ राजेंद्र प्रसाद चंद्रवंशी एवं तमाम सेनानियों को जुलूस का नेतृत्व सौंपा. जुलूस रमना मैदान होते हुए शहर के मुख्य मार्ग से आरा रेलवे स्टेशन परिसर स्थित वीर बांकुड़ा की आदमकद प्रतिमा पर प्रशासन के विरोध के बावजूद राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल सिंह शक्रवार ने अपने साथियों के साथ माल्यार्पण किया और बताया कि “लोकतंत्र में सरकार जनता की होती है. सरकार को व्यक्तिवादी नहीं होने दिया जायेगा. आज जहां पूरा शाहाबाद विजयोत्सव मना रहा है. वहां प्रतिमा का अनावरण न होना लोकतंत्र के लिए अभिशाप है. हम लोगों ने मांग की थी कि 23 अप्रैल तक प्रतिमा का अनावरण हो. यह शाहाबाद एवं बाबू साहब के प्रति सच्ची निष्ठा होती, लेकिन खेद है कि आज तक ऐसा नहीं हुआ. उसके बाद कुंवर सिंह मैदान में जाकर मुख्य सभा हुई, जिसमें गण्यमान्य लोगों ने हिस्सा लिया. इस मौके पर डॉ शशि बाबा ने कहा कि भोजपुर निष्ठा और बलिदान की धरती है. सभा की अध्यक्षता राष्ट्रीय कुंवर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल सिंह शक्रवार ने की. बतौर मुख्य अतिथि प्रोफेसर गांधीजी राय एवं राष्ट्रीय सेना के संस्थापक सर्वेश्वर पांडे के सुपुत्र मनीष पांडे तथा पूर्व विधान पार्षद रण विजय सिंह रहे. जबकि विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण राय,, राजगुरु शशि बाबा, राणा प्रताप सिंह, शिवदास सिंह थे. जबकि संचालन अरुणेश सिंह वरीय अधिवक्ता ने किया. अन्य वक्ताओं में रामकुमार सिंह, अजीत रंजन, लव कुमार, प्रोफेसर अशोक कुमार,कयूम अंसारी, रवींद्र रजक, डॉ ममता मिश्रा, पप्पू यादव, जितेंद्र सिंह,कालिका सिंह, पूर्व प्राचार्य। योगिंदर सिंह, टुनटुन सिंह, प्रोफेसर उमाशंकर सिंह, प्रोफेसर अरुण सिंह, सुरेंद्र सिंह, जयशंकर सिंह कुशवाहा, मोहम्मद राजा खां ,रमाशंकर पांडे, डॉ शिलभद्र एवं प्रज्ञा यादव वार्ड पार्षद आदि प्रमुख थे.

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Author: DEVENDRA DUBEY

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