Arrah Filariasis Patient : आरा जिले से फाइलेरिया के दंश को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. जिला स्तर से लेकर पंचायत और गांव स्तर तक फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का सघन अनुश्रवण किया जा रहा है. वहीं, बीमारी की रोकथाम के लिए समुदाय को केंद्र में रखकर लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है. जिले में फिलहाल फाइलेरिया के 2375 मरीज पाए गए हैं, जिनमें 310 हाइड्रोसिल के मरीज शामिल हैं.
साल में एक बार दवा सेवन करने की अपील
सिविल सर्जन डॉ. शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि फाइलेरिया दीर्घकालिक दिव्यांगता का दूसरा प्रमुख कारण है. यह बीमारी गंभीर और जटिल जरूर है, लेकिन इससे बचाव का तरीका काफी सरल है. उन्होंने लोगों से हर वर्ष संचालित होने वाले एमडीए राउंड के दौरान फाइलेरिया की दवा का सेवन करने की अपील की.
उन्होंने बताया कि लगातार पांच वर्षों तक साल में एक बार फाइलेरिया की दवा का सेवन करने से लोग इस बीमारी से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाथीपांव और हाइड्रोसील दोनों फाइलेरिया के ही रूप हैं.
ऑपरेशन से हाइड्रोसील का इलाज संभव
सिविल सर्जन ने बताया कि हाइड्रोसील का उपचार ऑपरेशन के माध्यम से संभव है. इसके लिए मरीजों को समय पर उपचार कराने और बीमारी को लेकर जागरूक रहने की जरूरत है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से फाइलेरिया मरीजों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है.
एमडीए अभियान में 98.23 फीसदी लोगों ने ली दवा
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि फरवरी में संचालित एमडीए अभियान के दौरान जिले की कुल योग्य आबादी में से 98.23 प्रतिशत लोगों ने फाइलेरिया की दवा का सेवन किया था. उन्होंने कहा कि यह सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता के स्तर को दर्शाता है.
1175 हाथीपांव मरीजों को मिली एमएमडीपी किट
उन्होंने बताया कि जिले में हाथीपांव के 1175 मरीजों को एमएमडीपी किट वितरित की जा चुकी है. इन किट के माध्यम से मरीजों को बीमारी के प्रबंधन और प्रभावित अंगों की देखभाल में मदद मिलती है. फाइलेरिया से होने वाली दिव्यांगता को कम करने के लिए मरीजों की देखभाल पर भी स्वास्थ्य विभाग का जोर है.
दवा को लेकर भ्रांतियां दूर करना बनी चुनौती
डॉ. संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक फाइलेरिया के सामूहिक दवा सेवन अभियान में लोगों को दवा के प्रति जागरूक करना बड़ी चुनौती माना जाता था. दवा के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर लोगों के बीच कई तरह की भ्रांतियां और आशंकाएं रहती थीं.
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में केवल दवा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं था. जरूरी था कि गांव के लोग खुद आगे आएं और एक-दूसरे से संवाद करते हुए स्वास्थ्य कार्यक्रम को अपनी जिम्मेदारी समझें.
रोगी हितधारक मंच से बढ़ रही सामुदायिक भागीदारी
इसी सोच के साथ सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए सीएचओ के नेतृत्व में रोगी हितधारक मंच का गठन किया गया है. यह मंच फाइलेरिया मरीजों और समुदाय के बीच संवाद का माध्यम बन रहा है. इसके जरिए लोगों को बीमारी, दवा सेवन और मरीजों की देखभाल से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है.
समुदाय की भागीदारी से फाइलेरिया उन्मूलन की उम्मीद
फाइलेरिया उन्मूलन के लिए नियमित दवा सेवन के साथ लोगों में बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है. स्वास्थ्य विभाग का जोर गांव और पंचायत स्तर तक समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर है. लगातार दवा सेवन, मरीजों की देखभाल और जागरूकता के जरिए जिले से फाइलेरिया के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है.
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