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थाना क्षेत्र के तीर्थकॉल गांव के समीप नासरीगंज-सकडडी सड़क किनारे सोन नदी के तट पर स्थित लोक आस्था का ब्रह्म बाबा के पास हर साल बसंत पंचमी के अवसर पर लगने वाले परंपरा की मेले की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है. यह मेला लगभग 400 वर्ष पहले से लगते आ रहा है, जहां जिला और राज्य ही नहीं बल्कि यूपी, झारखंड, एमपी तथा बंगाल से लाखों श्रद्धालु आकर अपनी मन्नतें के अनुसार प्रसाद चढ़ाते हैं तथा परिवार को सही सलामत रखने के लिए कामना करते हैं.कैसे हुआ ब्रह्मबाबा की स्थापना
ग्रामीण प्रो देवेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि हमलोग अपने बुजुर्गों से सुनते आ रहे है कि तीर्थकॉल गांव के पहले सुरुंगापुर गांव में खेत हुआ करता था, जिसके फसल के पटवन करने के लिए चेला गांव के ग्रामीणों के द्वारा पानी को हमेशा रोक दिया जाता था. इसको लेकर दोनों गांवों में तनाव चला आ रहा था. एक दिन चेला गांव की बरात जा रही थी, जो सोन नदी को पार करने के लिए नदी के तट पर रुका हुई थी. इसकी सूचना तीर्थकॉल गांव के ग्रामीणों को मिली. इसके बाद पूरे गांव के ग्रामीणों के द्वारा बरात पर हमला कर दिया गया, जिसमें दूल्हा, सहबाला तथा दाई की हत्या कर दी गयी. इसके बाद से गांव में ब्रह्मलूक यानि आग लगना शुरू हो गया. इससे यहां के ग्रामीणों ने काफी परेशान होकर पूजा करने की मन्नतें मांगा गया. फिर पूजा की तैयारी हुआ मुहूर्त निकलवाकर विधिवत पूजा अर्चना की गयी तब से ग्रामीणों को राहत मिली. इस संबंध में अंचलाधिकारी अरुण कुमार तथा थानाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि मेले में भीड़ को देखते हुए जिला से अतिरिक्त महिला तथा पुरुष बलों की मांग की गयी. इसके लिए पांच जगहों पर बेरियर बनाया जा रहा है . जहां से सवारी तथा भारी वाहनों को मेला में प्रवेश पर वर्जित रहेगा . मेला में कई जगहों पर महिला तथा पुरुष बल ग्रामीण पुलिस तैनात किये जायेंगे .डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
