आरा : सोन में विसर्जन के लिए नहीं उठी भोलेनाथ की प्रतिमा, फिर यहीं बना धाम,जानिए कोईलवर के बाबा दिनेश्वरनाथ की अनोखी कहानी

Baba Dineshwarnath Dham : कोईलवर के सोन नदी तट पर स्थित बाबा दिनेश्वरनाथ धाम शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. करीब दो दशक पुरानी वह घटना, जब भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा विसर्जन के दौरान उठी ही नहीं, इस धाम की कहानी को और भी खास बनाती है. सावन के महीने में यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

Baba Dineshwarnath Dham : सावन में भोजपुर समेत पूरे बिहार में शिवभक्ति की बयार बह रही है. हर तरफ बोल बम और हर हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं. इसी आस्था के बीच कोईलवर के सोन नदी तट पर स्थित बाबा दिनेश्वरनाथ धाम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. मंदिर से जुड़ी करीब दो दशक पुरानी कहानी इसे खास बनाती है. स्थानीय मान्यता के अनुसार विसर्जन के दौरान भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा उठी ही नहीं थी.

सोन तट पर बसा है बाबा दिनेश्वरनाथ धाम

कोईलवर के गोरैया स्थान घाट के समीप सोन नदी के किनारे बाबा दिनेश्वरनाथ धाम स्थित है. राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 100 मीटर बताई जाती है. यही वजह है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां पहुंचना आसान है. सोन की धारा, दूर तक फैली रेत और नदी किनारे का शांत वातावरण मंदिर की धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक आकर्षण भी बढ़ाता है.

सावन में हर हर महादेव के जयकारों से गूंजता है परिसर

सावन के महीने में बाबा दिनेश्वरनाथ धाम में शिवभक्तों की भीड़ बढ़ जाती है. श्रद्धालु सोन नदी में स्नान करने के बाद बाबा दिनेश्वरनाथ को जल अर्पित करते हैं. मंदिर परिसर और आसपास का इलाका बोल बम और हर हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहता है. स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

विसर्जन के दौरान नहीं उठी थी भोलेनाथ की प्रतिमा

स्थानीय लोगों के अनुसार करीब दो दशक पहले गोरैया स्थान घाट पर दूसरे स्थान से पूजा के बाद देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए लाई गई थीं. सभी प्रतिमाओं को वाहन से उतारकर पूजा-अर्चना के बाद सोन नदी में विसर्जित किया जा रहा था. जब भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा को उठाने की बारी आई तो वह अपनी जगह से उठी ही नहीं.

घंटों प्रयास के बाद भी टस से मस नहीं हुई प्रतिमा

बताया जाता है कि श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को उठाने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिली. घंटों कोशिश के बाद भी जब प्रतिमा नहीं उठी तो लोगों ने उसे वहीं छोड़ दिया. इसके बाद मिट्टी की प्रतिमा लंबे समय तक धूप और बारिश में रहने के कारण खराब हो गई. इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों के बीच आस्था और विश्वास की भावना और मजबूत हुई.

स्थानीय लोगों के सहयोग से हुआ मंदिर का निर्माण

प्रतिमा से जुड़ी घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों, सोन नदी में बालू निकालने वाले मजदूरों और नाविकों ने मिलकर यहां मंदिर निर्माण में सहयोग किया. मंदिर में भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित की गई. इसके अलावा बजरंग बली और राम दरबार की प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं. धीरे-धीरे यह स्थान बाबा दिनेश्वरनाथ धाम के रूप में श्रद्धालुओं के बीच पहचान बनाने लगा.

सोन नदी से जल लेकर बाबा को अर्पित करते हैं भक्त

सावन में कई श्रद्धालु सोन नदी में स्नान करने के बाद बाबा को जल अर्पित करते हैं. वहीं कुछ भक्त मंदिर से उतरकर पूर्वी कोने की ओर स्थित गंगा, सोन और सरयू के संगम स्थल से कांवर में जल भरते हैं. इसके बाद करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर बाबा दिनेश्वरनाथ को जल चढ़ाते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से बाबा की पूजा करने पर उनकी मनोकामना पूरी होती है.

लगन के मौसम में हर दिन होते हैं विवाह

बाबा दिनेश्वरनाथ मंदिर पूजा-अर्चना के साथ विवाह समारोहों के लिए भी जाना जाता है. लगन के मौसम में गोरैया घाट स्थित मंदिर में बड़ी संख्या में जोड़ों का विवाह कराया जाता है. मंदिर के पुरोहित के अनुसार कुछ मौकों पर एक दिन में तीन दर्जन तक शादियां होने की बात सामने आई है. विवाह के लिए आने वाले लोगों के बीच भी मंदिर के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है.

विवाह करने वाले जोड़ों का किया जाता है निबंधन

मंदिर प्रबंधन के अनुसार विवाह के लिए आने वाले वर-वधू और उनके परिजनों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है. मंदिर में परिणय सूत्र में बंधने वाले प्रत्येक जोड़े का निबंधन भी किया जाता है. प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है.

सोन नदी का किनारा बढ़ाता है मंदिर की खूबसूरती

बाबा दिनेश्वरनाथ धाम की खासियत केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. सोन नदी का किनारा, कलकल बहती धारा और दूर तक फैली रेत यहां आने वाले लोगों को आकर्षित करती है. मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं को कुछ देर रुकने और शांत माहौल का अनुभव करने का अवसर भी देता है.

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By Deepak kumar gupt

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