चौथी व अंतिम सोमवारी आज, शिवालयों में हुई विशेष तैयारी

नौ अगस्त को जिले भर में मनाया जायेगा रक्षाबंधन

आरा/उदवंंतनगर.

भगवान शिव को प्रिय सावन माह अब समाप्ति की ओर है. आज सावन का चौथा और अंतिम सोमवारी है, जिससे शिवभक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. आज महिलाएं सोमवारी व्रत रखेंगी. आगामी नौ अगस्त को सावन पूर्णिमा के दिन भाई बहनों का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जायेगा. मान्यता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है और रोगों से मुक्ति मिलती है तथा मनुष्य मनोवांछित फल को प्राप्त करता है.

सावन की चौथी सोमवारी को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. मंदिरों में जहां साज सजावट व रंग रोगन कार्य किया गया है. वहीं, श्रद्धालुओं के आगमन व विधि व्यवस्था के इंतजाम का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. चार अगस्त को सावन का चौथी और अंतिम सोमवारी होने के चलते मंदिर प्रबंधन कमर कसे हुए हैं. दूर-दराज से आने वाले शिव भक्तों के आगमन व उनके ठहराव की व्यवस्था में मंदिर प्रबंधन जुटा हुआ है, जिससे श्रद्धालु शिव अराधना व जलाभिषेक कर सकें. सोमवारी का विशेष महत्व है. इस सोमवारी पर सर्वार्थ सिद्धि योग के अलावा ब्रह्म व इंद्र योग बन रहा है. हिंदू धर्म में सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत शुभ माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त में शिव पूजन श्रेयस्कर होगा. जिन महिला व कुंवारी कन्याओं ने सोमवारी व्रत रखा है, वे आज के दिन उसका उद्यापन कर सकेंगी. जिले के तमाम शिव मंदिर व देवालय श्रद्धालुओं के लिए तैयार है. आरा के पतलेश्वर महादेव, सिद्धेश्वर महादेव, महादेवा शिव, बाबा लंगटनाथ धाम, शाहपुर के कुंडेश्वर महादेव, बहरी महादेव, संगमेश्वर महादेव, खंडोल आदि शिव मंदिरों में बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं की भीड़ महादेव को जलाभिषेक के लिए उमड़ती है. पूरे सावन वातावरण में चतुर्दिक हर हर महादेव का जयघोष सुनाई देता है. भोर होते ही मंदिरों से वैदिक मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनाई देने लगती है. सावन को लेकर सभी बड़े व प्रसिद्ध शिव मंदिरों का रंग रोगन किया गया तथा बिजली बल्बों की लड़ियों से सजायी गयी है. सभी प्रसिद्ध शिव मंदिरों में आस्था का भारी जन सैलाव उमड़ने की उम्मीद की जा रही है. बाल, वृद्ध, युवा, महिला सभी वर्ग के श्रद्धालु सोमवारी व्रत व शिव पूजन तैयारी में में जुट गये हैं. खासकर महिलाएं व युवतियां सोमवारी का व्रत रखती हैं. ऐसा करने से कुंवारी कन्याओं से योग्य वर मिलता है वहीं घर में सुख शांति और समृद्धि आती है. सावन में वातावरण शिव मय हो गया है.

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Author: DEVENDRA DUBEY

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