देश भर में चल रहे छात्र-छात्राओं के संघर्षों के समर्थन में तथा असंवेदनशील व्यवस्था, शिक्षा की दुर्दशा और जनसरोकारों की उपेक्षा के विरोध में सिविल सोसायटी, आरा (बिहार) के तत्वावधान में जयप्रकाश स्मारक, मुक्ताकाश मंच पर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रहा.
इस दौरान एक जनसभा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता रंजन कुमार सिंह ने की.
शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति लोकतांत्रिक मूल्यों की आधारशिला
धरना में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, छात्र-युवाओं एवं जागरूक नागरिकों ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में नागरिकों की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और जनसंघर्षों के प्रति एकजुटता लोकतांत्रिक मूल्यों की आधारशिला है.
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर समाज की चुप्पी भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.
व्यापक जनभागीदारी और संवेदनशीलता की मांग
वक्ताओं ने जनतंत्र, शिक्षा और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए व्यापक जनभागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया तथा देशभर में जनहित के प्रश्नों पर चल रहे आंदोलनों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया.
धरना स्थल पर उपस्थित लोगों ने जनता के मुद्दों पर संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था की मांग दोहराई.
दर्जनों प्रबुद्ध लोगों ने लिया संकल्प
धरना स्थल पर ओम प्रकाश यादव, अशोक मानव, विजय मेहता, मंटू सिंह, सुनील कुमार सिंह, विक्की सिंह, उपेंद्र यादव, वीरेंद्र राय, राकेश कुमार सिंह, सुशील कुमार, डॉ. लक्ष्मी कुमारी, प्रह्लाद सिंह, नीलाम्बुज सरोज, भीम यादव, अमरदीप प्रसाद, राजेंद्र सिंह, धनंजय कुमार, नाथूराम और विनोद चंद्रवंशी सहित दर्जनों लोगों ने अपनी उपस्थिति से धरना को मजबूती प्रदान की.
सभी ने शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से जनसरोकारों के प्रश्नों को उठाते रहने का संकल्प लिया. साथ ही जिले के नागरिकों, छात्र-युवाओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक संगठनों से प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे धरना स्थल पर पहुंचकर इस अभियान को मजबूत बनाने की अपील की गई.
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