आगामी 3 अगस्त को वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होने वाली भोजपुरी कला प्रदर्शनी सह भोजपुरी कला संगोष्ठी की तैयारियों को लेकर रविवार को स्थानीय वरिष्ठ चित्रकार कमलेश कुंदन के मौला बाग स्थित आवास पर कलाकारों की वैचारिक बैठक आयोजित की गई.
बैठक में प्रदर्शनी को सफल बनाने तथा भोजपुरी चित्रकला को व्यापक पहचान दिलाने पर विस्तार से चर्चा की गई.
पारंपरिक चित्र शैलियों और लोकजीवन का होगा प्रदर्शन
बैठक में बताया गया कि यह आयोजन आसरा सेवा केंद्र एवं प्रभाव क्रिएटिव सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में होगा.
प्रदर्शनी में भोजपुरी की पारंपरिक चित्र शैलियों, पिड़िया लेखन, कोहबर लेखन तथा भोजपुरिया लोकजीवन, संस्कृति और सभ्यता पर आधारित कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जाएगा. इसके साथ ही मुख्य मंच पर कला संगोष्ठी का भी आयोजन होगा.
राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का प्रयास: कमलेश कुंदन
वरिष्ठ चित्रकार कमलेश कुंदन ने कहा कि भोजपुरी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और जीवन का आधार है. उन्होंने कहा कि सभी कलाकार मिलकर भोजपुरी चित्रकला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं.
वहीं कला शिक्षक रौशन राय ने कहा कि प्रदर्शनी में भोजपुरी की मूल चित्र परंपराओं को केंद्र में रखकर कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके.
तैयारियों को लेकर दिखा उत्साह
बैठक में कलाकार सुशील विश्वकर्मा, रूपा देवी, मधु कुमारी, अमन राज, अंकिता सिन्हा, खुशबू कुमारी, मीरा कुमारी एवं प्रिया कुमारी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रदर्शनी की तैयारियों को लेकर उत्साह जताया.
कलाकारों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन भोजपुरी कला एवं संस्कृति को नई पहचान देने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
