Bharat Tiwari Encounter Case : भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच कर रहे न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट 18 जुलाई के बाद राज्य सरकार को सौंपी जाएगी. यह जानकारी आयोग के सचिव सह सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार श्रीवास्तव ने गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. उन्होंने बताया कि मामले में अब तक पीड़ित पक्ष के नौ लोगों की गवाही दर्ज की जा चुकी है, जबकि 16 जुलाई से पुलिस प्रशासन के अधिकारियों और कर्मियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है.
उन्होंने बताया कि पीड़ित पक्ष की तरफ से अब तक कुल नौ लोगों की गवाही ली गई है. इसमें प्राथमिकी दर्ज करने वाले भरत तिवारी की मां आशा देवी, उनके पिता, भौजाई, भाई एवं बहन के साथ अन्य लोग शामिल हैं. पीड़ित पक्ष के मुख्य साक्षी का एक से डेढ़ घंटे तक बयान दर्ज किया जा चुका है ताकि उनकी सारी बातें बयान में आ जाएं. इतना ही समय अन्य गवाहों को भी दिया गया है.
Arrah News : पुलिस अधिकारियों और कर्मियों का बयान दर्ज
श्री श्रीवास्तव ने बताया कि 16 जुलाई से पुलिस प्रशासन का बयान दर्ज किया जा रहा है. 16 जुलाई को पांच पुलिस पदाधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों का बयान दर्ज किया जाना था, परंतु एक पुलिस पदाधिकारी के आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं होने के कारण चार का ही बयान दर्ज किया गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस के पहले तीन लोगों का बयान दर्ज किया गया था, जबकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद एक पुलिस पदाधिकारी का बयान दर्ज किया जाएगा.
पुलिस प्रशासन की तरफ से जगदीशपुर के पूर्व एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के पूर्व थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, अनुसंधानकर्ता संजीव कुमार तथा एसटीएफ के पीएसआई विकास कुमार का बयान 16 जुलाई को दर्ज किया गया, जबकि एसआई हरिचंद कुमार के नहीं आने से उनका बयान दर्ज नहीं हो पाया.
11 पुलिसकर्मियों को सम्मन, पारदर्शिता के लिए वीडियोग्राफी
17 जुलाई को बयान दर्ज करने के लिए आयोग ने 11 पुलिस वालों को सम्मन भेजा है. यदि 17 जुलाई को इनमें से कोई नहीं आया तो फिर 18 जुलाई को उनका बयान दर्ज किया जाएगा. श्री श्रीवास्तव ने बताया कि 18 जुलाई को अंतिम बयान दर्ज करने की तिथि के बाद कभी भी अंतरिम प्रतिवेदन दिया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि पीड़ित पक्ष एवं पुलिस प्रशासन की तरफ से जितने भी बयान दर्ज किए गए हैं, उन सभी की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे. पीड़ित पक्ष के लोगों ने अपने मन से जो भी बयान दिया, उसे हूबहू दर्ज किया गया है. मामले में पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस द्वारा भरत तिवारी की हत्या की गई थी, जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि उनके द्वारा अवैध हथियार रखा गया था और स्थितियों को देखते हुए एनकाउंटर किया गया था.
दूसरे फेज की गवाही के लिए देना होगा शपथ पत्र
सचिव ने बताया कि 18 जुलाई के बाद आगे की तिथि तय की जाएगी तथा दूसरे फेज के लिए बयान दर्ज करने का सिलसिला चलेगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए जो भी अपना बयान दर्ज करना चाहता है, उसे शपथ पत्र देना होगा. शपथ पत्र के बाद ही उन्हें बयान के लिए बुलाया जाएगा.
इस दौरान उनके पास जो भी साक्ष्य होगा, चाहे वह वीडियो हो, इलेक्ट्रॉनिक हो या अन्य कोई संसाधन, उसे आयोग में जमा कराया जा सकता है. जो लोग खुले में गवाही देना चाहेंगे, उनकी गवाही उसी तरह ली जाएगी. बिलौटी पहुंचकर खुले में गवाही लेने की बात जब प्रभात खबर द्वारा कही गई, तो आयोग के सचिव ने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है और बिलौटी पहुंचकर खुले में गवाही नहीं ली जाएगी, अन्यथा वहां अत्यधिक गैदरिंग हो जाएगी.
जरूरत पड़ने पर न्यायालय से मंगाया जा सकता है मोबाइल
श्री श्रीवास्तव ने मोबाइल के संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि यह वर्तमान में न्यायालय में जमा है और यह वहीं रहेगा. परंतु जब प्रभात खबर द्वारा पूछा गया कि आयोग को यह अधिकार है कि वह न्यायालय से भी मोबाइल को मंगा सकता है, तो उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उसे जरूर मंगाया जाएगा.
उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता को कहा गया है कि आप बयान से संबंधित सभी कागजात ले सकते हैं, लेकिन अभी तक उनकी तरफ से कोई आवेदन नहीं आया है. इस कारण बयान से संबंधित कागजात अभी तक नहीं दिए गए हैं. अंतरिम प्रतिवेदन सौंपे जाने के बाद दूसरे फेज के लिए बयान दर्ज करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू की जाएगी.
Also Read : शेखपुरा रहा बिहार का सबसे गर्म जिला, 37.7°C तापमान के बाद बारिश से मिली राहत
