Bharat Tiwari Encounter : (मिथिलेश्वर प्रसाद सिन्हा) भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब जांच ने रफ्तार पकड़ ली है, इधर बिहार मानवाधिकार आयोग (Bihar Human Rights Commission) इस मामले में एक्शन में आ गया है. BHRC ने मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. आयोग ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस कदम के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और पूरे मामले पर नजरें टिक गई हैं.
पहले NHRC में उठाया गया मामला
इससे पहले 20 जून 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इस पूरे प्रकरण को National Human Rights Commission के सामने उठाया था. उन्होंने इस केस की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराने की मांग की. शिकायत में यह भी कहा गया कि मृतक युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा था और उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई, जिससे पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हुए.
पुलिस मुख्यालय ने मानी बड़ी चूक
वहीं इस मामले में बिहार पुलिस मुख्यालय ने पहली बार खुलकर अपनी गलती स्वीकार की है. लॉ एंड ऑर्डर एडीजी सुधांशु कुमार ने 22 जून 2026 को प्रेस वार्ता कर बताया कि 16 जून को जब पुलिस टीम आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने गई थी, तब उसे सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया. उन्होंने माना कि पुलिस के स्तर पर गंभीर चूक हुई थी, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता.
SHO समेत 5 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
इस बड़ी लापरवाही को देखते हुए विभाग ने तुरंत सख्त एक्शन लिया. मामले से जुड़े SHO, दो दरोगा, एक एएसआई और एक सिपाही को निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि विभाग अब किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्ती बरतने के मूड में है.
DIG को सौंपी गई जांच, वैज्ञानिक तरीके से होगी पड़ताल
एडीजी सुधांशु कुमार ने प्रेस वार्ता में आगे कहा कि बिहार सरकार ने जांच प्रक्रिया को और तेज करते हुए इसकी जिम्मेदारी शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी को सौंप दी है. एडीजी ने बताया कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी. इसके लिए फॉरेंसिक साइंस लैब सहित आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हर तथ्य साफ हो सके. पुलिस मुख्यालय खुद इस जांच की लगातार निगरानी कर रहा है.
मामले पर गरमाई सियासत
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है. विपक्ष लगातार इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है. वहीं सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी चिंता जताते हुए पारदर्शी जांच की जरूरत बताई है. इस घटना ने राजनीतिक माहौल को भी काफी प्रभावित किया है.
फिलहाल यह मामला अब सिर्फ एक एनकाउंटर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य का बड़ा मुद्दा बन चुका है. मानवाधिकार आयोग की सक्रियता, पुलिस की स्वीकारोक्ति और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है. आने वाले दिनों में जांच के नतीजे ही तय करेंगे कि इस पूरे मामले में आगे क्या कड़ा कदम उठाया जाएगा.
