भोजपुर में बनेगा भव्य एक्वा पार्क, 31.20 करोड़ की लागत से 32 एकड़ में होगा तैयार, DM ने किया निरीक्षण

Arrah News: भोजपुर जिले के उदवंतनगर प्रखंड अंतर्गत कारीसाथ स्थित वाणासुर मत्स्य बीज प्रक्षेत्र में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एक भव्य समेकित एक्वा पार्क का निर्माण होने जा रहा है. जिलाधिकारी ने प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद इस स्थल का गहन निरीक्षण किया. इस पार्क को बनने से जलकृषि पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा.

Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) भोजपुर जिले के लिए एक बहुत बड़ी और गौरवपूर्ण विकास योजना सामने आई है. जिले के उदवंतनगर प्रखंड अंतर्गत कारीसाथ स्थित ऐतिहासिक वाणासुर मत्स्य बीज प्रक्षेत्र में जल्द ही बिहार का पहला और अत्याधुनिक समेकित एक्वा पार्क बनकर तैयार होगा. इस महात्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए सोमवार को जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने पूरी प्रशासनिक टीम के साथ प्रक्षेत्र का विस्तृत स्थल निरीक्षण किया.

इस परियोजना को भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप से प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग से पूर्व में ही इस पूरे सरकारी प्रक्षेत्र का सीमांकन और नापी का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा चुका है. अब इस चिह्नित 32 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में कुल 3120.92 लाख (करीब 31.20 करोड़) रुपये की भारी-भरकम लागत से अत्याधुनिक एक्वा पार्क का निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है.

कार्प हैचरी, फिश फीड मिल और लैब सहित बनेंगे 17 आधुनिक अवयव

समेकित एक्वा पार्क परियोजना के तहत इस परिसर के भीतर कुल 17 अलग-अलग प्रमुख अवयवों का निर्माण किया जाएगा, जो मत्स्य पालन के क्षेत्र में बिहार को आत्मनिर्भर बनाएंगे. जिला मत्स्य पदाधिकारी ने जिलाधिकारी को नक्शे और ब्लूप्रिंट के माध्यम से प्रस्तावित निर्माण से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी.

एक्वा पार्क की मुख्य तकनीकी विशेषताएं:

  • कार्प हैचरी (Carp Hatchery): उन्नत किस्म की मछलियों के जीरा (बीज) उत्पादन के लिए अत्याधुनिक हैचरी.
  • आरएएस तकनीक (RAS Tech): री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम के तहत कम पानी में अधिक मछली उत्पादन.
  • फिश फीड मिल (Fish Feed Mill): मछलियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले चारे का स्थानीय स्तर पर उत्पादन.
  • क्वॉलिटी टेस्टिंग लैब्स: पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए और मछलियों की बीमारियों व स्वास्थ्य जांच के लिए दो अलग-अलग आधुनिक प्रयोगशालाएं.
  • प्रशासनिक भवन: पार्क के सुचारु संचालन के लिए एक भव्य प्रशासनिक विंग और ट्रेनिंग सेंटर.

जलकृषि पर्यटन का बनेगा बड़ा हब, डीएम ने समय सीमा में काम पूरा करने का दिया निर्देश

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कारीसाथ में बनने वाला यह एक्वा पार्क एक राष्ट्रीय स्तर का विशिष्ट संस्थान होगा. इसके पूरी तरह विकसित होने से न केवल उत्तर और दक्षिण बिहार के मत्स्य पालकों को आधुनिक प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि राज्य में जलकृषि पर्यटन को भी एक नई ऊंचाई मिलेगी. यह केंद्र बिहार को मछली उत्पादन में पूर्ण आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा.

जिलाधिकारी ने मौके पर उपस्थित सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाकर काम करने और सभी आवश्यक विभागीय प्रक्रियाओं व टेंडरिंग को पूरी तरह समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने का कड़ा निर्देश दिया. इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के अवसर पर भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) आरा सदर, कार्यपालक अभियंता (विद्युत प्रमंडल आरा), जिला मत्स्य पदाधिकारी, उदवंतनगर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) एवं अंचलाधिकारी (CO) सहित निर्माण एजेंसी के कई तकनीकी अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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