Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह) आरा शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था अब खुलकर सामने आने लगी है. एक ओर जहां शहर का प्रमुख स्थल वीर कुंवर सिंह मैदान गंदगी का अड्डा बनता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बरसात से पहले नालों और नालियों की सफाई नहीं होने से पूरे शहर के जलमग्न होने का खतरा मंडरा रहा है. नगर निगम की कार्यशैली को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.
वीर कुंवर सिंह मैदान बना कचरे का ढेर
एनटीपीसी द्वारा सौंदर्यीकरण के बाद साफ-सुथरे और आकर्षक बने वीर कुंवर सिंह मैदान की स्थिति अब दयनीय हो गई है. मैदान के चारों तरफ कचरा पसरा हुआ है, जिससे यहां आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह मैदान शहर का हृदयस्थल माना जाता है, जहां प्रतिदिन सुबह-शाम हजारों लोग टहलने, योग और व्यायाम के लिए आते हैं. महिलाओं और बच्चों की भी अच्छी-खासी संख्या रहती है. लेकिन गंदगी के कारण अब लोगों को खुले वातावरण का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मैदान की नियमित सफाई नहीं हो रही है. कभी-कभार एक सफाई कर्मी आता भी है तो केवल मुख्य द्वार के आसपास सफाई कर चला जाता है, जबकि पूरे मैदान में कचरा फैला रहता है. मैदान में लगाए गए घास की भी हालत खराब हो गई है. समय पर कटिंग और सिंचाई नहीं होने के कारण घास सूख रही है और कई जगह बेतरतीब ढंग से बढ़ रही है.
नगर निगम पर लापरवाही का आरोप
लोगों का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह की पहल पर मैदान का सौंदर्यीकरण कराया गया था, लेकिन अब नगर निगम इसकी देखरेख में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है. महापौर पर भी केवल औपचारिक कार्य करने का आरोप लगाया जा रहा है.
नालों की सफाई नहीं, बरसात में बढ़ेगा संकट
वहीं दूसरी ओर, बरसात से पहले शहर के नालों और नालियों की सफाई नहीं होने से हालात और गंभीर हो सकते हैं. शहर में 22 से अधिक आउटफॉल नाले और सैकड़ों नालियां हैं, जिनकी सफाई बेहद जरूरी है. फिलहाल स्थिति यह है कि अधिकांश नाले कचरे से भरे हुए हैं, जिससे पानी का निकास बाधित हो रहा है. कई जगहों पर हल्की बारिश या घरों का पानी भी सड़कों पर बहने लगता है.
टापू बन सकता है आरा शहर
यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो बरसात में पूरा शहर जलमग्न हो सकता है. लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में भारी परेशानी होगी और शहर टापू में तब्दील हो सकता है.
लाखों खर्च के बावजूद व्यवस्था फेल
नालों और नालियों की सफाई पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नहीं दिख रहा है. नगर निगम पर राशि के दुरुपयोग के आरोप भी लग रहे हैं.
संसाधन कम, सवाल ज्यादा
नगर निगम के पास सफाई के सीमित संसाधन हैं-महज 3 जेसीबी, 5 ट्रैक्टर, 2 सक्शन मशीन, 10 पंपिंग सेट और 2 एस्केवेटर. जबकि नगर निगम का वार्षिक बजट 7 अरब 53 करोड़ 69 लाख रुपये से अधिक है. ऐसे में 45 वार्डों में प्रभावी सफाई व्यवस्था कैसे होगी, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. नागरिकों ने नगर निगम से जल्द सफाई अभियान चलाने और व्यवस्था सुधारने की मांग की है, ताकि आने वाले बरसात में शहर को जलजमाव और गंदगी से बचाया जा सके.
अपर नगर आयुक्त का बयान
अपर नगर आयुक्त मो. जमाल अख्तर अंसारी ने कहा कि जहां भी गंदगी है, वहां सफाई कराई जाएगी. उन्होंने माना कि सफाई करना निगम का दायित्व है और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसे जल्द ठीक किया जाएगा.
