Arrah Heatewave News : (नरेन्द्र प्रसाद सिंह) आरा जिले में इन दिनों भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, तो दूसरी तरफ तेजी से गिरता जलस्तर लोगों के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर चापाकल सूखने लगे हैं और पीने के पानी की किल्लत साफ नजर आने लगी है. बीते एक हफ्ते से जारी तेज गर्मी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.
गर्म हवाओं ने बढ़ाई परेशानी
जिले में पछुआ हवा के तेज झोंके चल रहे हैं. बीच-बीच में पुरवा हवा भी लोगों को राहत देने के बजाय उमस बढ़ा रही है. लोग पसीने से तरबतर हो रहे हैं. दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है. गर्मी के कारण लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं.
गिरता जलस्तर बना चिंता का कारण
लगातार घट रहे जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई इलाकों में चापाकल ने पानी देना कम कर दिया है या पूरी तरह सूख गए हैं. अगर जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में जल संकट और गहरा सकता है.
पाइपलाइन लीकेज से रोजाना बर्बाद हो रहा पानी
एक तरफ लोग पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर में जगह-जगह पाइपलाइन फटने से हजारों लीटर पानी रोजाना बर्बाद हो रहा है. नगर के करीब दो दर्जन स्थानों पर पाइपलाइन जर्जर हालत में है. इस वजह से घरों तक सही प्रेशर में पानी नहीं पहुंच पा रहा है. तय समय पर सप्लाई होने के बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है.
लापरवाही से भी बढ़ रहा संकट
सिर्फ विभाग ही नहीं, आम लोगों की लापरवाही भी जल संकट को बढ़ा रही है. कई जगहों पर पानी टंकी भरने के बाद भी ओवरफ्लो होता रहता है. गाड़ियों की सर्विसिंग में भी भारी मात्रा में पानी बर्बाद किया जा रहा है. अगर इन आदतों में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो सकती है.
क्या कहते हैं विभाग के अधिकारी
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि लोगों को पानी के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी होगी. अनावश्यक पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां चापाकल सूखने की शिकायत मिलेगी, वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जाएगा. साथ ही नए चापाकल लगाने की योजना भी तैयार की गई है.
इन उपायों पर देना होगा ध्यान
जल संकट से निपटने के लिए अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है. वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना होगा. शहर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य करना होगा. कुआं, तालाब और पोखरों का जीर्णोद्धार जरूरी है. गंदे पानी के ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर उसका दोबारा उपयोग किया जा सकता है.साथ ही हर स्तर पर पानी की बर्बादी रोकना बेहद जरूरी है.
आरा में गर्मी और जल संकट ने मिलकर हालात को गंभीर बना दिया है. अगर समय रहते प्रशासन और आम लोग नहीं जागे तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है. फिलहाल जरूरत है जागरूकता और ठोस कार्रवाई की, ताकि लोगों को राहत मिल सके.
