आरा से मो.वसीम की रिपोर्ट
Arrah Electric Shock Death News : भोजपुर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नागोपुर गांव में मंगलवार की सुबह एक दर्दनाक हादसे में 41 वर्षीय किसान दिनेश यादव की करंट लगने से मौत हो गई. वे खेत जाने के दौरान रास्ते में गिरे विद्युत प्रवाहित तार की चपेट में आ गए. गंभीर हालत में परिजन उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं.
खेत जाने के दौरान हुआ हादसा
परिजनों के अनुसार, दिनेश यादव रोज की तरह सुबह घर से खेत के लिए निकले थे. इसी दौरान गांव के रास्ते में पहले से बिजली का तार टूटकर जमीन पर गिरा हुआ था. आसपास कोई चेतावनी या सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी. अनजाने में वे उसी तार के संपर्क में आ गए और तेज करंट लगने से मौके पर ही गिर पड़े.
शोर मचने पर पहुंचे लोग, लेकिन नहीं बच सकी जान
घटना के बाद आसपास के लोगों ने जब उन्हें गिरा देखा तो शोर मचाया. आवाज सुनकर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें तुरंत उठाकर अस्पताल ले जाने लगे. हालांकि उनकी हालत बेहद गंभीर थी और आरा सदर अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है. वहीं इस घटना के बाद इलाके में बिजली विभाग की लापरवाही को लेकर लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक दिनेश यादव अपने परिवार के बड़े सदस्य थे. उनके परिवार में पत्नी इंदु देवी, दो बेटियां बेबी कुमारी और रश्मि कुमारी तथा दो बेटे ओम प्रकाश यादव और विकास यादव हैं. अचानक हुई इस घटना से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है. घर में चीख-पुकार मची है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
जनप्रतिनिधि पहुंचे, दिलाया भरोसा
घटना की जानकारी मिलने के बाद राजद नेता रघुपति यादव भी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की. उन्होंने परिजनों को सांत्वना देते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.
इस हादसे ने एक बार फिर बिजली विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है. खुले में पड़े टूटे तार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते तार को हटाया जाता, तो शायद एक परिवार उजड़ने से बच जाता. अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कदम उठाया जाता है.
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