आरा: महाजन टोली ठाकुरबाड़ी में 113वें कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह की तीसरी निशा संपन्न; शास्त्रीय गायन और कथक की प्रस्तुतियों से कलाकारों ने बांधा समां

आरा के महाजन टोली में 113वें कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह का भव्य आयोजन हुआ. युवा गायक रोहित कुमार और नृत्यांगनाओं ने शास्त्रीय गायन व कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं.

Arrah News: भोजपुर जिले के आरा शहर में शास्त्रीय कला और संगीत की समृद्ध विरासत आज भी जीवंत रूप में देखने को मिल रही है. महाजन टोली स्थित ऐतिहासिक ठाकुरबाड़ी प्रांगण में लीजेंड बक्शी कुलदीप नारायण मेमोरियल द्वारा आयोजित 113वें कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह की तीसरी निशा का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन चर्चित कवियित्री डॉ. किरण कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए डॉ. किरण कुमारी ने कहा कि आरा की शास्त्रीय संगीत परंपरा राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध और ऐतिहासिक रही है. उन्होंने स्मरण कराया कि बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा द्वारा आयोजित ऐतिहासिक संगीत सम्मेलनों में भारत रत्न और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत देश के शीर्षस्थ कलाकारों ने अपनी अप्रतिम प्रस्तुतियां देकर इस धरा के संगीत गौरव को वैश्विक पहचान दिलाई है.

राग यमन में गणेश वंदना और राग पहाड़ी में ठुमरी ने मोहा मन

समारोह की तीसरी शाम शास्त्रीय सुरों और शास्त्रीय नृत्य की जुगलबंदी से पूरी तरह सराबोर रही. कार्यक्रम में युवा गायक रोहित कुमार ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन में निबद्ध सुरीली गणेश वंदना से की. इसके बाद उन्होंने राग पहाड़ी पर आधारित पारंपरिक ठुमरी "सैंया बिना घर सूना" और प्रसिद्ध बोल "बातों-बातों में बीत गई रात, सजन तुम रूठ गए बोलो न..." प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. रोहित के शास्त्रीय गायन और सुर-ताल के अद्भुत संगम पर सभागार में मौजूद संगीत रसिकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया.

पारंपरिक कथक और नयनाभिराम भाव-भंगिमाओं से सजी शाम

गायन के उपरांत शास्त्रीय नृत्य की मोहक प्रस्तुतियां मंच पर देखने को मिलीं. नृत्यांगना खुशी कुमारी गुप्ता और हर्षिता विक्रम ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक की पारंपरिक शैलियों और सधे हुए भाव-अभिनय के जरिए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इसके साथ ही नवोदित बाल कलाकारों सिद्धि नारायणी, श्रेया गुप्ता एवं पूजा कुमारी ने अपने अंग-संचालन, भाव-भंगिमा और हस्त-विन्यास की सुंदर प्रस्तुति से खूब वाहवाही लूटी. कार्यक्रम का सफल एवं गरिमामयी मंच संचालन आदित्या श्रीवास्तव द्वारा किया गया, जबकि अतिथियों और कलाकारों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन गुरु बक्शी विकास ने किया.

साहित्य और संगीत जगत के कई गणमान्य रहे उपस्थित

इस संगीतमय शाम के गवाह बनने के लिए शहर के कई प्रतिष्ठित कला-प्रेमी और साहित्यकार कार्यक्रम में मौजूद रहे. समारोह में मुख्य रूप से प्रख्यात शास्त्रीय गायिका विदुषी बिमला देवी, वरिष्ठ कवि जनमजय ओझा सहित साहित्य, कला और संगीत जगत के अनेक गणमान्य बुद्धिजीवी उपस्थित थे. देर रात तक चले इस सांस्कृतिक अनुष्ठान ने शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किए रखा.

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By नरेद्र प्रसाद सिंह

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