हमें सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करना चाहिए : मुनि प्रशांत

सप्त चक्र का जागरण व पंच परमेष्ठी अनुष्ठान का आयोजन

चक्र जाग्रत होने से शरीर में उत्साह का संचार होता है, सृजनात्मक शक्ति बढ़ती है. शारीरिक मानसिक लाभ प्राप्त होता है आशा व उल्लास बना रहता है.

फारबिसगंज. आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमार जी मुनिश्री कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में ब्रह्मांडीय ऊर्जा जैन मंत्रों द्वारा सप्त चक्र का जागरण व पंच परमेष्ठी अनुष्ठान का आयोजन हुआ. विशेष प्रयोगात्मक अनुष्ठान करवाते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा-हमारे पूरे ब्रह्मांड में अनेकों शक्तियां फैली हुई है. पाॅजिटिव, नेगेटिव ऊर्जा है. जिस पर हम आकर्षित होते हैं वहीं हमें प्राप्त होता है. हमें सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करना है. पंच परमेष्ठी की ऊर्जा ब्रह्मांड में है अनन्त तीर्थंकर हो चुके है उनकी पवित्र ऊर्जा ब्रह्मांड में है. तीर्थंकर विकारों से मुक्त होते है. कषाय से मुक्त परम पवित्र आत्मा है. अरिहंत परमात्मा की ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए तीन चाबी है. “समर्पण भाव ” अरिहंत परमात्मा के चरणों में समर्पित रहना है.विनय भाव से विकास होता है. “कृतज्ञता ” सिद्धात्मा, अरिहंत प्रभु का हमारे पर बहुत बहुत उपकार है. उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहें. “वंदना ” परम पवित्र आत्मा को वंदन करने से हमारे भीतर वीतराग भाव जागृत होता है.उनकी कृपा बनी रहती है. ब्रह्मांड से जो ऊर्जा का प्रवाह आ रहा है वह हीलिंग पाॅवर में सक्षम है। ये ऊर्जा सभी तरह की समस्याओं को दूर करने वाली है.

भारी संख्या में मौजूद थे श्रावक

चक्र सुप्त होने से समस्या बढ़ती है. चक्र जाग्रत होने से शरीर में उत्साह का संचार होता है. सृजनात्मक शक्ति बढ़ती है. शारीरिक मानसिक लाभ प्राप्त होता है, आशा व उल्लास बना रहता है. मौके पर अध्यक्ष महेंद्र बैद ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया. पड़ोसी देश नेपाल के दुहबी से विमल मालू, कटिहार से सुषमा पटावरी, फारबिसगंज से नीलम बोथरा, निर्मल मरोठी ने अपने अनुभव व्यक्त किये.जबकि संचालन मुनिश्री कुमुद कुमार जी ने किया. आभार ज्ञापन सभा मंत्री मनोज भंसाली ने दिया. नेपाल व भारत के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक समाज मौजूद थे.

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