फारबिसगंज में नरक बनी अनुमंडल कार्यालय जाने वाली मुख्य सड़क: नाले के अभाव में जलजमाव, गंदे पानी से गुजरने को मजबूर हजारों लोग

फारबिसगंज में प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई है. शहर की मुख्य सड़क जलजमाव और बदहाली का शिकार है, जिससे हजारों राहगीरों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है. नाले के अभाव में घरों का मलजल सड़क पर बह रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है.

अररिया जिले के फारबिसगंज शहर में प्रशासनिक विकास के दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है. शहर के राम मनोहर लोहिया पथ (पुरानी बस स्टैंड रोड) से अनुमंडल कार्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इन दिनों भारी जलजमाव और बदहाली का शिकार है. सड़क के किनारे नाले (ड्रेनेज) का निर्माण न होने के कारण कुबेर टोला सहित कई हिस्सों में बारिश और घरों का गंदा पानी जमा हो गया है. आलम यह है कि इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले हजारों राहगीरों और स्कूली बच्चों को सड़ांध मारते गंदे पानी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है.

वीआईपी दफ्तरों और SH-77 को जोड़ने वाला अहम मार्ग है बदहाल

यह सड़क सिर्फ एक आम रास्ता नहीं है, बल्कि फारबिसगंज शहर के कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तरों और दूसरे इलाकों को जोड़ने वाली एक लाइफलाइन है:

  • महत्वपूर्ण कार्यालयों का रास्ता: इसी मार्ग से होकर लोग अनुमंडल कार्यालय, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) कार्यालय, व्यवहार न्यायालय (सिविल कोर्ट), वाणिज्य कर कार्यालय और अनुमंडलीय अस्पताल तक पहुंचते हैं.
  • जाम से बचने का विकल्प: यह सड़क शहर को सीधे एसएच-77 (SH-77) से जोड़ती है. मुख्य बाजार के जाम से बचने के लिए लोग रामपुर, परवाहा, जुम्मन चौक, प्रखंड कार्यालय, नरपतगंज और पलासी जैसे क्षेत्रों में कम समय में पहुंचने के लिए इसी वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करते हैं.

वार्ड 8 और 13 का विवाद: सड़क पर बह रहा घरों का गंदा पानी

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, इस जलजमाव के पीछे प्रशासनिक लापरवाही और सीमा विवाद एक बड़ा कारण है:

  1. नगर परिषद और पंचायत का पेंच: इस सड़क का एक हिस्सा नगर परिषद के वार्ड संख्या 08 में पड़ता है, जबकि अधिकांश भाग रामपुर उत्तर पंचायत के वार्ड संख्या 13 के अंतर्गत आता है.
  2. सड़क पर बहता मलजल: वार्ड 13 के कुबेर टोला में करीब 600 से 800 घर हैं. सड़क किनारे नाला न होने के कारण इन सभी घरों का गंदा पानी और यहां तक कि शौचालयों का मलजल सीधे मुख्य सड़क पर बहता है. मानसून की बारिश में स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाती है.

प्रशासन की अनदेखी, जनता में भारी आक्रोश

लाखों रुपये के राजस्व और टैक्स वसूली के बावजूद जल निकासी की इस गंभीर समस्या पर न तो नगर परिषद ध्यान दे रहा है और न ही प्रखंड प्रशासन ने कोई ठोस पहल की है.

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जलजमाव और सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए गए हैं, लेकिन अब तक कोई भी धरातलीय कार्रवाई नहीं हुई है. गंदे पानी के जमाव से इलाके में संक्रामक बीमारियों (महामारी) के फैलने का खतरा मंडरा रहा है. स्थानीय लोगों ने जिला और अनुमंडल प्रशासन से मांग की है कि अविलंब सड़क के दोनों ओर पक्के नाले का निर्माण कराकर इस स्थायी जलजमाव से मुक्ति दिलाई जाए, अन्यथा वे उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे.


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लेखक के बारे में

कलीमउद्दीन प्रिंट माध्यम में 24 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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