मध्य विद्यालय पथरदेवा में एमडीएम में कीड़ा-बाल मिलने की शिकायत, छात्रों और अभिभावकों का विरोध

बथनाहा के मध्य विद्यालय पथरदेवा में मध्याह्न भोजन में कीड़ा और बाल मिलने की शिकायत से हड़कंप मच गया. छात्रों और अभिभावकों ने विरोध जताया, जिसके बाद प्रधानाध्यापक ने कीड़ा मिलने की बात स्वीकार की. मामले की उच्चस्तरीय जांच और नियमित निगरानी की मांग की जा रही है.

Bathanaha MDM Controversy: बथनाहा (अररिया). मध्य विद्यालय पथरदेवा में एमडीएम की गुणवत्ता को लेकर बुधवार को छात्रों और अभिभावकों ने विरोध जताया. विद्यार्थियों का आरोप है कि भोजन में कीड़ा और बाल मिला. शिकायत के बावजूद संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर मामला पूर्व पंचायत समिति प्रतिनिधि नीरज यादव तक पहुंचा.

भोजन में कीड़ा और बाल मिलने की शिकायत

विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि मध्याह्न भोजन में सोयाबीन में कीड़ा और सब्जी में बाल मिला. इसे लेकर छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई. उन्होंने स्कूल की भोजन व्यवस्था की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की.

फोटो- प्रधानाध्यापक संजय मिश्रा

प्रधानाध्यापक ने सोयाबीन में कीड़ा मिलने की बात मानी

मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रधानाध्यापक संजय मिश्रा ने सोयाबीन में कीड़ा मिलने की बात स्वीकार की. हालांकि उन्होंने सब्जी में बाल मिलने के आरोप से इनकार किया. प्रधानाध्यापक के इस बयान के बाद भी अभिभावकों ने भोजन की गुणवत्ता और रसोई की व्यवस्था की जांच कराने की मांग की.

फोटो- स्कूली बच्चों में रोष

तीन महीने से गैस सिलेंडर नहीं मिलने का आरोप

विद्यालय की रसोइया ने बताया कि पिछले तीन महीने से गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया है. ऐसे में मजबूरी में जलावन के सहारे भोजन पकाया जा रहा है. रसोइया के अनुसार इससे रसोई में साफ-सफाई और भोजन तैयार करने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

पूर्व पंचायत समिति प्रतिनिधि नीरज यादव ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और उन्हें मिलने वाले गुणवत्तापूर्ण भोजन से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

नियमित निगरानी की उठी मांग

Bathanaha MDM Controversy: स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से स्कूलों में एमडीएम की नियमित निगरानी कराने की मांग की है. उनका कहना है कि भोजन की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी लापरवाही दोबारा सामने न आए.


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By Vinay Kumar

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