अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड प्रमुख ओमप्रकाश पासवान के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है. प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सह कार्यपालक पदाधिकारी ने बिहार पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर रोक लगा दी है. इस निर्णय के बाद क्षेत्र में गरमाया राजनीतिक माहौल फिलहाल शांत होता नजर आ रहा है.
बीडीओ ने पत्र जारी कर दी जानकारी
प्रखंड विकास पदाधिकारी सह कार्यपालक पदाधिकारी (पंचायत समिति) कर्मजीत राम ने पत्रांक-1008, दिनांक 31 जुलाई 2026 के माध्यम से सभी पंचायत समिति सदस्यों को लिखित आदेश जारी किया है.
पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 44(3)(1) के तहत पंचायत समिति के कार्यकाल के अंतिम छह माह के दौरान प्रखंड प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता. इस कारण विशेष बैठक की तिथि निर्धारित नहीं की जा सकती.
25 सदस्यों ने सौंपा था अविश्वास प्रस्ताव
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 28 जुलाई (सोमवार) को पंचायत समिति सदस्य जलीसा खातून के नेतृत्व में कुल 25 सदस्यों ने प्रमुख ओमप्रकाश पासवान के खिलाफ बीडीओ को स्वहस्ताक्षरित आवेदन सौंपा था.
आवेदन में प्रखंड प्रमुख पर विभिन्न आरोप लगाते हुए विशेष बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की गई थी.
प्रमुख के प्रतिवेदन के आधार पर लिया गया निर्णय
आवेदन मिलने के बाद बीडीओ ने पत्रांक-989 जारी कर प्रखंड प्रमुख से विशेष बैठक की तिथि तय करने का अनुरोध किया था.
इसके जवाब में प्रखंड प्रमुख ओमप्रकाश पासवान ने बीडीओ को लिखित रूप से अवगत कराया कि पंचायती राज अधिनियम के तहत कार्यकाल के आखिरी 6 महीनों में अविश्वास प्रस्ताव लाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है.
प्रमुख के प्रतिवेदन और पंचायती राज अधिनियम की समीक्षा के बाद बीडीओ ने अविश्वास प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया. प्रक्रिया रुकने के बाद अब फारबिसगंज की आगे की स्थानीय राजनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
