पवित्र श्रावण मास के अवसर पर 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष के बीच गुरुवार को अररिया से शिवभक्तों का एक जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) के लिए रवाना हुआ. केसरिया वस्त्र धारण कर, हाथों में कांवड़ लिए ये श्रद्धालु भक्ति और आस्था की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए सबसे पहले सुल्तानगंज के लिए रवाना हुए.
यात्रा से पहले काली मंदिर में लिया आशीर्वाद
पदयात्रा प्रारंभ करने से पूर्व सभी कांवड़िये अररिया स्थित प्रसिद्ध काली मंदिर परिसर में एकत्र हुए. वहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपनी यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की. श्रद्धालुओं ने संपूर्ण देशवासियों की सुख, शांति, समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी भोलेनाथ से प्रार्थना की.
सुल्तानगंज से जल भरकर तय करेंगे 105 किमी की कठिन दूरी
जत्थे के सदस्यों ने बताया कि परंपरा और धार्मिक नियमों के अनुसार:
- वे सबसे पहले सुल्तानगंज (अजगैबीनाथ) पहुंचेंगे.
- वहां उत्तरवाहिनी गंगा नदी से पवित्र गंगाजल कांवड़ में भरेंगे.
- इसके बाद सुल्तानगंज से देवघर तक की लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय कर झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचेंगे और भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे.
जत्थे में शामिल प्रमुख शिवभक्त
अररिया आरएस क्षेत्र से शुरू हुई इस पावन यात्रा में शामिल मुख्य श्रद्धालुओं में:
- रवींद्र कुमार (बम), किशोर साह, अमित गुप्ता, राजन गुप्ता, मनोज रॉय, राहुल कुमार, मोंटी सिंह, मिथिलेश कुमार, शामिल हैं.
"भोले की भक्ति में कष्ट भी बन जाता है आनंद"
कांवड़ियों का कहना है कि श्रावण मास में हर साल निकलने वाली यह पदयात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि अपार धैर्य, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है. कठिन रास्ते और पैरों के छालों के बावजूद बाबा भोलेनाथ की भक्ति में सारा कष्ट आनंद में बदल जाता है.
मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों व सेवा शिविरों द्वारा कांवड़ियों के लिए भोजन, विश्राम, चिकित्सा और शुद्ध पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था की गई है.
