नृत्य व गीत के साथ मनाया गया सरहुल महोत्सव

यह पर्व प्रकृति व परिवर्तन का प्रतीक है

-4–5-प्रतिनिधि, भरगामा

प्रखंड के गम्हरिया गांव में आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में रविवार को सरहुल महोत्सव सह मिलन समारोह पारंपरिक उत्साह व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समुदाय के लोक गीतों से हुई. मुख्य अतिथि राजद के पूर्व विधायक अनिल कुमार यादव ने फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. उमवि मुरियारी टोला गम्हरिया के मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन में प्रखंड क्षेत्र सहित सीमावर्ती सुपौल जिले के विभिन्न गांवों से भारी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व समिति सदस्य भुवदेव उरांव ने की व मंच संचालन राकेश कुजूर ने किया. यह पर्व प्रकृति व परिवर्तन का प्रतीक है, जो बसंत ऋतु में नये पत्तों के आगमन पर मनाया जाता है. चैत्र माह की तृतीया तिथि से शुरू होकर यह उत्सव चार दिनों तक चलता है, जिसमें पूजा, उपवास, बलि व पारंपरिक नृत्य-गान का आयोजन होता है. इस पर्व की एक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में आदिवासियों ने कौरवों का साथ दिया था व उनकी शवों को साल के पत्तों से ढकने पर वे सड़ने से बच गये थे. तभी से साल के फूलों व पत्तों का विशेष महत्व इस पूजा में माना जाता है.

सरहुल में केकड़ा पूजा का विशेष महत्व

केकड़े को धागे से बांधकर पूजा घर में टांगा जाता है व फिर उसका चूर्ण बनाकर गोबर के साथ धान की बुवाई में उपयोग किया जाता है. यह उपज व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. मौके पर राजद प्रखंड अध्यक्ष सरोज सिंह, प्रो. सुरेश कुमार यादव, मुखिया प्रतिनिधि रामकुमार साह, भूदेव उरांव, सीताराम उरांव, संजय मुंडा, ललित उरांव समेत कई जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे.

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