Forbesganj News: श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर फारबिसगंज में संस्कृत भाषा और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किया गया. शहर के बगीचा चौक स्थित दरोगी सिंह बजरंगबली मंदिर में जय मां शारदे आध्यात्मिक मंच की ओर से संस्कृत दिवस सह गायत्री जयंती समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में सांवलिया कुंज महावीर ठाकुरबाड़ी हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित विमल दूबे को सम्मानित किया गया.
समारोह में उन्हें पुष्पगुच्छ, माला, शॉल और पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया. सम्मान पाने के बाद मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं.
संस्कृत दिवस पर क्यों हुआ आयोजन?
कार्यक्रम के संयोजक विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि भारत में श्रावणी पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के पर्व के रूप में ही नहीं देखा जाता, बल्कि इसे ऋषियों के स्मरण, पूजा और समर्पण के पर्व के रूप में भी माना जाता है.
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ऋषियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है और संस्कृत साहित्य के आदि स्रोत भी ऋषि ही माने जाते हैं. इसी परंपरा को याद करने और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से संस्कृत दिवस मनाया जाता है.
1969 से मनाया जा रहा संस्कृत दिवस
समारोह में संस्कृत दिवस के इतिहास और उद्देश्य पर भी चर्चा हुई. विनोद तिवारी ने बताया कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के आदेश के बाद वर्ष 1969 से केंद्रीय और राज्य स्तर पर संस्कृत दिवस मनाया जा रहा है.
इसका प्रमुख उद्देश्य संस्कृत भाषा के प्रति लोगों में रुचि पैदा करना और इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है. संस्कृत को भारतीय ज्ञान, साहित्य, दर्शन और आध्यात्मिक परंपरा की महत्वपूर्ण भाषा के रूप में देखा जाता है.
पंडित विमल दूबे को शॉल और पुस्तक देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद चौक के समीप स्थित सांवलिया कुंज महावीर ठाकुरबाड़ी हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित विमल दूबे को विशेष रूप से सम्मानित किया गया.
पुजारी राजेंद्र प्रसाद सिंह, समाजसेवी ब्रजेश राय और मंच के संयोजक विनोद कुमार तिवारी ने उन्हें पुष्पगुच्छ, माला, शॉल और पुस्तक भेंट की.
आयोजकों ने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में मंदिरों से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ऐसे लोगों का सम्मान नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जोड़ने का माध्यम भी बन सकता है.
रक्षाबंधन और ऋषि परंपरा का जुड़ाव
श्रावणी पूर्णिमा के दिन आयोजित इस कार्यक्रम में रक्षाबंधन और ऋषि परंपरा के संबंध पर भी चर्चा हुई.
आयोजकों के अनुसार, यह दिन भारतीय परंपरा में ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी रहा है. संस्कृत भाषा के माध्यम से भारतीय साहित्य, दर्शन, धार्मिक ग्रंथों और ज्ञान की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ी है.
इसी वजह से संस्कृत दिवस का आयोजन सिर्फ भाषा से जुड़ा कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर भी माना गया.
Forbesganj News: मंदिर परिसर में जुटे लोग
संस्कृत दिवस सह गायत्री जयंती समारोह के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा. स्थानीय लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर आयोजकों की पहल की सराहना की.
कार्यक्रम में सुनील दास, श्याम देव साह, संजय कुमार, दिलखुश मिश्रा, रंजीत सिंह, मनीष राज तिवारी सहित कई लोग मौजूद थे.
आयोजकों का कहना है कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजन आगे भी किये जाते रहेंगे.
