आरती देने निकले थे पुजारी, सूनेपन का फायदा उठाकर चोरों ने मारी बाजी
घटना के संबंध में मंदिर के संरक्षक मनोज साह ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरी वारदात बुधवार की शाम संध्या आरती के समय घटित हुई. मंदिर के मुख्य पुजारी (पंडित जी) प्रतिदिन की भांति शाम को भगवान की विधि-विधान से संध्या आरती संपन्न करने के बाद गर्भगृह को खुला छोड़कर आसपास के स्थानीय दुकानदारों व राहगीरों को आरती देने निकले थे. पुजारी की इसी चंद मिनटों की अनुपस्थिति और मंदिर के सूनेपन का फायदा उठाकर वहाँ पहले से ताक में बैठे शातिर चोरों ने गर्भगृह में प्रवेश किया और भगवान शिव व माता पार्वती के सिर पर सजे चांदी के दोनों मुकुटों को चोरी कर रफूचक्कर हो गए. पंडित जी जब वापस लौटे तो मूर्तियों के सिर से मुकुट गायब देख उनके होश उड़ गए.
पार्षद की तत्परता पर पहुंची रेल पुलिस (GRP) और RPF, की पूछताछ
मुकुट चोरी होने की भनक लगते ही पुजारी ने तुरंत इसकी सूचना मंदिर के संरक्षक मनोज साह को दी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संरक्षक ने अविलंब स्थानीय नगर पार्षद प्रभात सिंह को पूरी घटना से अवगत कराया. नगर पार्षद प्रभात सिंह ने बिना समय गंवाए तत्काल इसकी आधिकारिक सूचना राजकीय रेल पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के वरीय अधिकारियों को दी. सूचना मिलते ही जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त पुलिस टीम फौरन रेलवे यार्ड स्थित मंदिर परिसर पहुंची. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, साक्ष्य जुटाए और आसपास के दुकानदारों व प्रत्यक्षदर्शियों से सघन पूछताछ की. नगर पार्षद प्रभात सिंह ने पुलिस प्रशासन से पुरजोर अनुरोध किया है कि मामले का स्पीडी ट्रायल करते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं और जल्द से जल्द दोषियों को गिरफ्तार कर चोरी की गई पवित्र मुकुट बरामद की जाए.
असामाजिक तत्वों का ‘अड्डा’ बना मंदिर परिसर, कार्रवाई की मांग
इस वारदात ने मंदिर की सुरक्षा और स्थानीय पुलिस की गश्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मंदिर के संरक्षक मनोज साह और स्थानीय दुकानदारों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि रेलवे यार्ड स्थित यह मंदिर परिसर इन दिनों पूरी तरह से असामाजिक तत्वों, जुआरियों और नशेडियों का सेफ जोन (जमावड़ा) बन चुका है. दिनभर संदिग्ध और असामाजिक प्रवृत्ति के लोग मंदिर के चबूतरों और आसपास मंडराते रहते हैं, जिससे पूजा-अर्चना करने आने वाली महिला श्रद्धालुओं को भी असहजता का सामना करना पड़ता है. स्थानीय नागरिकों ने जीआरपी और आरपीएफ के कप्तानों से लिखित मांग की है कि मंदिर परिसर में पुलिस की नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए और इस पवित्र धार्मिक स्थल को असामाजिक तत्वों के चंगुल से अविलंब मुक्त कराया जाए.
जोगबनी (अररिया) से सुदीप भारती की रिपोर्ट:
