जिले में धीमी गति से हो रही रबी फसलों की बोआई

किसानों को मार्गदर्शन व तकनीकी मदद उपलब्ध करा रहा विभाग

बोआई में होने वाली देरी से फसल उत्पादन हो सकता है प्रभावित

अररिया. दिसंबर माह का पहला सप्ताह खत्म होने वाला है. लेकिन अब तक गेहूं सहित अन्य रबी फसलों की बोआई अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी है. कृषि विशेषज्ञों की मानें तो नवंबर के दूसरे सप्ताह से गेहूं की बोआई का उपयुक्त समय होता है. 15 दिसंबर तक गेहूं की बोआई मुफीद मानी जाती है. इस बार मौसम की बेरुखी की वजह से गेहूं ही नहीं अमूमन सभी रबी फसलों की बोआई में देरी हो रही है. खेतों में नमी अब तक बरकरार है. इससे गेहूं की बुआई प्रभावित हो रही है. जिले में अब तक महज 15 फीसदी खेतों में रबी फसलों की बुआई हो सकी है. गौरतलब है कि इस वर्ष जिले में 01 लाख 02 हजार 512 हेक्टेयर पर रबी मक्का, 24 हजार 197 हेक्टेयर में गेहूं की खेती का लक्ष्य है.

बारिश व तूफान से रफ्तार पड़ी धीमी

जिले के किसानों पर इस वर्ष मौसम की बुरी तरह मार झेलनी पड़ी है. मोंथा तूफान की वजह से बीते अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह में जिले में हुई मूसलाधार बारिश की वजह से कृषि कार्य की रफ्तार धीमी कर दी है. बारिश का सीधा असर धान की कटाई पर पड़ा. जिले की मुख्य फसल माना जाने वाला धान के खेतों में पानी भर जाने की वजह से कटाई का कार्य बूरी तरह प्रभावित हुआ. नतीजतन रबी सीजन की बुवाई अटक गयी है. कृषि विशेषज्ञों की मानें तो यदि अगले 10–12 दिनों में बोआई पूरी नहीं की पाई तो प्रति एकड़ औसत पैदावार में 10-25 फीसदी की गिरावट संभव है.

खेतों में मौजूद नमी व तैयारी में हो रही देरी से बोआई प्रभावित

पलासी के किसान संजीव कुमार, मनोहर विश्वास, विश्वजीत सिंह ने बताया कि इस बार मौसम की बेरूखी किसानों पर भारी पड़ रहा है. खरीफ मौसम के आखिरी समय में हुई बारिश की वजह से धान की फसल खेतों में गिर गये. खेतों में जल-जमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी. नतीजतन धान के पौधे कटाई योग्य होने के बावजूद खेतों में पड़े रह गये. इससे फसल कटनी व तैयारी दोनों में देरी हुई. उत्पादन में भी 15 से 20 फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा. वहीं अब खेतों में नमी व खेत तैयार करने में हो रही देरी से रबी फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है. जिला कृषि पदाधिकारी गौरव प्रताप सिंह ने बताया कि किसान युद्धस्तर पर खेतों की तैयारी मे लगे हैं. रबी फसलों की बुआई के लिये मौसम अभी अनुकूल है. उचित देखभाल, बीज उपचार व सिंचाई के माध्यम से बुआई में होने वाली देरी के नुकसान को सीमित किया जा सकता है. कृषि विभाग किसानों की सहायता तत्पर है. किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन व तकनीकी मदद उपलब्ध करायी जा रही है.

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By Mrigendra mani singh

मृगेंद्रमणि सिंह प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के अररिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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