फारबिसगंज में उत्साह से मना पर्युषण महापर्व का शिखर दिवस, श्रावक-श्राविकाओं ने मांगी क्षमा

फारबिसगंज तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व का शिखर दिवस भगवती संवत्सरी पर्व धूमधाम से मनाया गया. इस आध्यात्मिक पर्व में आत्मरमण, संयम और आत्मसाधना पर जोर दिया गया. श्रावक-श्राविकाओं ने दिनभर उपवास रखकर क्षमायाचना की.

फारबिसगंज (अररिया). महायशस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी के दिशानिर्देश में मंगलवार को फारबिसगंज तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व का शिखर दिवस भगवती संवत्सरी पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया. पंचकूला और कोटा से आए उपासक द्वय मुनीश जैन और भूपेंद्र बरड़िया की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया.

पर्युषण आत्मरमण, संयम और आत्मसाधना का पर्व

धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपासक द्वय ने कहा कि भारत में मनाए जाने वाले अनेक पर्व भौतिकता से जुड़े होते हैं, जिनमें मिठाई, मौज-मस्ती और नए वस्त्रों की प्रमुखता रहती है. इसके विपरीत पर्युषण आध्यात्मिक पर्व है. यह आत्मरमण, संयम और आत्मसाधना की प्रेरणा देता है. उन्होंने बताया कि चातुर्मासिक काल के दौरान मनाए जाने वाले इस पर्व का मुख्य दिवस संवत्सरी महापर्व है. जैन परंपरा में इस दिन आत्मचिंतन, संयम और क्षमायाचना को विशेष महत्व दिया जाता है.

खाद्य संयम से स्वाध्याय और ध्यान तक

उपासक द्वय ने कहा कि सावन-भादो के दौरान हरियाली और सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति अधिक होने के कारण जैन अनुयायी इस अवधि में हरियाली का त्याग करते हैं. पर्युषण महापर्व के प्रमुख अंगों में खाद्य संयम, स्वाध्याय, सामायिक, वाणी संयम, अणुव्रत चेतना, जप, ध्यान और संवत्सरी दिवस शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन साधनाओं की निष्पत्ति क्षमापना दिवस के साथ होती है, जब लोग अपने द्वारा जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं.

भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों की चर्चा

उपासक द्वय ने भगवान महावीर के 27 पूर्व भवों, जन्म, दीक्षा, परीषह और कैवल्य से जुड़े प्रसंगों की चर्चा की. उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जीवन संयम, तप और आत्मसाधना की चेतना विकसित करने की प्रेरणा देता है. वरिष्ठ श्रावक निर्मल मरोठी ने सुधर्मा स्वामी से लेकर अन्य आचार्यों के जीवन वृत्तांत पर प्रकाश डाला और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया.

महिला और कन्या मंडल ने प्रस्तुत की गीतिका

कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल की ओर से भगवान महावीर की स्तुति के साथ हुई. इसके बाद महिला मंडल, युवती मंडल और कन्या मंडल की सदस्यों ने गीतिका प्रस्तुत की. सरिता सेठिया, समता दुगड़, सुमन चिंडालिया और दीपक समदरिया सहित अन्य ने एकल गीतिका प्रस्तुत कर धर्मसभा को भाव-विभोर किया. कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ श्रावक निर्मल मरोठी ने किया.

दिनभर आहार-पानी का त्याग कर की क्षमायाचना

संवत्सरी पर्व के अवसर पर श्रावक-श्राविकाओं ने दिनभर आहार और पानी का त्याग कर साधना की. इस दौरान उन्होंने 84 लाख जीवयोनियों से क्षमा याचना की. श्रद्धालुओं ने कहा कि संवत्सरी पर्व आपसी मैत्री, शांति, संयम और क्षमाभाव का संदेश देता है.

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लेखक के बारे में

By विपुल विश्वास

विपुल विश्वास प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सिकटी (अररिया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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