परिसीमन के पेंच में उलझा त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव, दिसंबर 2026 तक चुनाव संपन्न होने के आसार कम

अररिया में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव परिसीमन के कारण अटक गया है. नए सिरे से होने वाले परिसीमन और 2011 की जनगणना के आधार पर होने वाले पुनर्गठन के चलते चुनाव दिसंबर 2026 तक टल सकते हैं. इससे संभावित उम्मीदवारों और मतदाताओं को लंबा इंतजार करना पड़ेगा.

अररिया जिले में त्रि-स्तरीय पंचायती राज चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीण मतदाताओं को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. राज्य सरकार द्वारा नए परिसीमन (Delimitation) के बाद ही पंचायत चुनाव कराने के निर्णय से पूरी चुनाव प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ गई है. इस नई व्यवस्था के कारण दिसंबर 2026 तक तय समय-सीमा के भीतर चुनाव संपन्न होने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है.

प्रारंभिक तैयारियां ठप, नए सिरे से होगा परिसीमन

जिला पंचायती राज विभाग ने जून माह में ही चुनाव की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी थीं. मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित कर दावे व आपत्तियां भी ले ली गई थीं:

  • मंत्रिमंडल के फैसले से बदला समीकरण: राज्य कैबिनेट द्वारा नए परिसीमन का निर्णय लिए जाने के बाद मतदान केंद्रों के निर्धारण, आरक्षण रोस्टर और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन का काम बीच में ही रोक दिया गया है.
  • 2011 की जनगणना बनेगी आधार: नए निर्देशों के तहत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा. पंचायत की आबादी के अनुसार उसकी सीमा और संरचना तय होगी.

अररिया में बढ़ सकती है 211 पंचायतों की संख्या

वर्तमान में अररिया जिले में कुल 211 ग्राम पंचायतें हैं:

  • सीमाओं में बदलाव व नई पंचायतें: परिसीमन के बाद कई पंचायतों का भूगोल बदलेगा और कई नई पंचायतों का गठन संभव है.
  • बदलेगा आरक्षण का स्वरूप: पंचायतों की संख्या और वार्डों के पुनर्गठन से पदवार आरक्षण का समीकरण भी पूरी तरह बदल सकता है, जिससे जनप्रतिनिधियों की संख्या में इजाफा होगा.
वर्तमान स्थितिपरिसीमन के बाद संभावित बदलाव
कुल पंचायतें: 211पंचायतों की संख्या में बढ़ोतरी
आरक्षण: पुराना रोस्टर लागूनया आरक्षण रोस्टर बनेगा
वार्ड व बूथ: पुरानी व्यवस्थानए सिर से पुनर्गठन व परिसीमन

चुनाव टलने पर क्या होगी प्रशासनिक व्यवस्था?

वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 के अंत तक समाप्त हो रहा है. यदि तब तक परिसीमन और चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो:

  1. वैकल्पिक व्यवस्था/प्रशासक: सरकार को पंचायतों के संचालन के लिए परामर्शदात्री समिति (Advisory Committee) या प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ सकती है.
  2. कार्यकाल विस्तार की चर्चा: प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा जारी है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है.

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग से विस्तृत गाइडलाइन मिलने के बाद ही परिसीमन का कार्य धरातल पर शुरू हो सकेगा. ऐसे में मुखिया, सरपंच, बीडीसी और जिला परिषद पद के दावेदारों को फिलहाल अपनी तैयारियों को थामकर इंतजार करना पड़ेगा.


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By Pankaj jha

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