NEET Success Story: कहते हैं मेहनत और अडिग हौसले के आगे बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं. इसी कहावत को सच कर दिखाया है अररिया जिले के पलासी प्रखंड अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव फुलसारा के होनहार छात्र आदर्श कुमार ने. सीमित संसाधनों, कोचिंग के अभाव और एक के बाद एक आए पारिवारिक झटकों के बावजूद आदर्श ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में शानदार सफलता हासिल की है. उनकी इस कामयाबी ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे अररिया जिले और सीमांचल क्षेत्र का नाम रोशन किया है.
दुखों का पहाड़: कर्ज, मौत और कैंसर की मार
आदर्श की सफलता कोई सामान्य कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्षों की एक लंबी और दर्दनाक दास्तान है. उनके पिता धर्मेन्द्र कुमार पेशे से एक साधारण किसान हैं और मां मीरा देवी स्वास्थ्य विभाग में आशा कार्यकर्ता (ASHA) हैं:
- आर्थिक तंगी और कर्ज: परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और खेती-किसानी के कारण पिता पहले से ही काफी कर्ज में डूबे हुए थे.
- एक के बाद एक मौतें: इसी तंगी के बीच आदर्श के छोटे भाई की एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. इस झटके से परिवार उबरा भी नहीं था कि उनके नाना काली कान्त मिश्र का भी निधन हो गया.
- मां को चौथी स्टेज का कैंसर: मुसीबतों का पहाड़ तब और टूट पड़ा जब आदर्श की मां मीरा देवी को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने घेर लिया, वह भी अपने चौथे (अंतिम) चरण में.
संघर्ष: मुंबई के अस्पताल से लेकर होम ट्यूशन तक
मां की गंभीर हालत को देखते हुए आदर्श को अपनी पढ़ाई छोड़कर लंबे समय तक उनके इलाज के लिए मुंबई के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े. जब वे गांव लौटे, तो परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभाने और खुद की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए आदर्श ने होम ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया.
आदर्श का संघर्ष उन्हीं की जुबानी: "महंगी कोचिंग या किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे. दिन भर मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था और रात में खुद पढ़ने बैठता था. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मैंने रोजाना 18 से 19 घंटे पढ़ाई की है. मैं 24 घंटे में सिर्फ 3-4 घंटे ही सो पाता था. मेरे मामा दिनेश मिश्रा और मामी मधुमिता देवी ने इस पूरे कठिन सफर में मेरा साये की तरह साथ दिया."
NEET Success Story: डॉक्टर बनकर करेंगे गरीबों का मुफ्त इलाज
महंगी कोचिंग और किताबों के अभाव के बावजूद, सिर्फ अपने अटूट आत्मविश्वास (Self-Confidence) और स्वाध्याय (Self-Study) के बल पर आदर्श ने यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है.
आदर्श की इस शानदार सफलता की खबर सुनते ही पूरे फुलसारा गांव और पलासी प्रखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है. उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. उनके दादा महेश कुमार झा और गांव के भूतपूर्व सरपंच धर्मनाथ झा ने आदर्श की सफलता पर अपना सीना चौड़ा करते हुए गर्व व्यक्त किया है.
जब आदर्श से उनके भविष्य के सपनों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अस्पताल की चौखटों पर गरीबों की बेबसी देखी है. इसलिए उनका एकमात्र लक्ष्य एक काबिल डॉक्टर बनकर गरीब और असहाय मरीजों की मुफ्त सेवा करना है.
