अररिया जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा तंत्र की मानवीय संवेदनशीलता के चलते रास्ता भटककर बिहार पहुंची पश्चिम बंगाल की एक असहाय महिला को न केवल सुरक्षित पनाह मिली, बल्कि वह अपने परिवार से भी दोबारा मिल सकी.
कुर्साकांटा थाना क्षेत्र में बेसहारा और बदहवास स्थिति में मिली इस महिला को वन-स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) की टीम ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित आश्रय दिया और जरूरी सत्यापन के बाद उसे उसके बेटे के सुपुर्द कर दिया.
कुर्साकांटा से लाई गई जिला मुख्यालय, मिला सुरक्षित ठिकाना
स्थानीय ग्रामीणों और कुर्साकांटा थाना पुलिस की नजर जब सड़क किनारे भटक रही इस अज्ञात महिला पर पड़ी, तो पुलिसकर्मियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसे सुरक्षित संरक्षण में ले लिया.
मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी विनोद दूहन ने तत्काल संज्ञान लिया. डीएम के निर्देश पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (डीपीओ) सह नोडल पदाधिकारी (मिशन शक्ति) कविता कुमारी ने महिला को जिला मुख्यालय अररिया स्थित वन-स्टॉप सेंटर में अल्पावास की सुविधा उपलब्ध कराई.
काउंसलिंग और संवाद से खुला घर का पता
वन-स्टॉप सेंटर में पहुंचते ही कर्मियों ने महिला को भोजन, वस्त्र और प्राथमिक चिकित्सा देखभाल मुहैया कराई.
शुरुआती दौर में महिला काफी डरी-सहमी थी. केंद्र के मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं और कर्मियों ने धैर्यपूर्वक महिला की काउंसलिंग की और अपनत्व भरे माहौल में उससे बातचीत शुरू की. निरंतर संवाद के बाद महिला ने अपनी पहचान और अपने गृह जिले पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के संबंध में अहम सुराग दिए.
उत्तर दिनाजपुर पुलिस से साधा संपर्क, बेटे से हुआ भावुक मिलन
महिला से मिली जानकारी के आधार पर मिशन शक्ति की टीम ने बिना देर किए पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिला पुलिस से औपचारिक संपर्क स्थापित किया.
- अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय के जरिए महिला के वास्तविक निवास और परिजनों का सटीक विवरण जुटाया गया.
- इसके बाद पुलिस व प्रशासन ने महिला के बेटे से संपर्क कर उसे मां के सुरक्षित होने की सूचना दी.
- बेटा अररिया पहुंचा, जहां आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक सत्यापन की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को आधिकारिक तौर पर उसके बेटे के हाथों में सौंप दिया गया.
अपनी खोई हुई मां को सकुशल पाकर बेटे की आंखें छलक पड़ीं. उसने अररिया जिला प्रशासन, कुर्साकांटा पुलिस और वन-स्टॉप सेंटर की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया.
