जोगबनी: राधाकृष्ण सरस्वती विद्या मंदिर में 'राष्ट्रीय खेल दिवस' की धूम, 650 विद्यार्थियों ने 15 से अधिक स्पर्धाओं में दिखाया दम

जोगबनी के राधाकृष्ण सरस्वती विद्या मंदिर में राष्ट्रीय खेल दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में 650 विद्यार्थियों ने 15 से अधिक खेल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया.

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी (अररिया) के पटेलनगर स्थित राधाकृष्ण सरस्वती विद्या मंदिर में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के पावन अवसर पर 'राष्ट्रीय खेल दिवस' अत्यंत हर्षोल्लास और खेल भावना के साथ मनाया गया. ओलंपिक में भारत को लगातार तीन स्वर्ण पदक दिलाकर तिरंगे का मान बढ़ाने वाले महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की स्मृति में आयोजित इस खेल उत्सव में विद्यालय के प्राथमिक, मध्य और वरिष्ठ वर्ग के लगभग 650 भैया-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और 15 से अधिक खेल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया.

दीप प्रज्वलन और नमन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ:

  • उद्घाटन सत्र: विद्यालय के प्रधानाचार्य विद्यानंद मंडल और खेल प्रमुख विश्वनाथ आचार्य ने संयुक्त रूप से मेजर ध्यानचंद के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर खेल दिवस का शुभारंभ किया.
  • उत्साह का माहौल: मैदान पर उतरते ही छात्र-छात्राओं का जोश देखते ही बन रहा था. पूरे परिसर में तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साहवर्धक नारों की गूंज सुनाई दे रही थी.

15 से अधिक खेल स्पर्धाएं: बच्चों ने दिखाया शानदार प्रदर्शन

आयु और वर्ग के अनुसार विभिन्न पारंपरिक व आधुनिक खेलों का आयोजन किया गया:

  • प्राथमिक एवं मध्य वर्ग: नन्हें बच्चों के लिए रोचक और मनोरंजक स्पर्धाएं आयोजित हुईं, जिनमें म्यूजिकल चेयर, मेंढक दौड़ (Frog Race), सुई-धागा दौड़, बैलून फोड़, जलेबी दौड़ और सामान्य एथलेटिक्स दौड़ शामिल थीं.
  • वरिष्ठ वर्ग: सीनियर भैया-बहनों के बीच कबड्डी, वॉलीबॉल और भाला फेंक (Javelin Throw) जैसी ऊर्जावान और प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जहां खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट तकनीक और शक्ति का प्रदर्शन किया.
प्रतियोगिता में शामिल बच्चे. | Prabhat Khabar Network

"खेल से विकसित होता है अनुशासित व्यक्तित्व": प्रधानाचार्य

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य विद्यानंद मंडल ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डाला:

  • शारीरिक और मानसिक विकास: उन्होंने कहा कि खेलों से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है, बल्कि विद्यार्थियों में टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन का भी विकास होता है.
  • संतुलन जरूरी: उन्होंने आह्वान किया कि 'स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है', इसलिए विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ मैदान पर खेलों में भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए.

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी खिलाड़ी हुए पुरस्कृत

दिनभर चले रोमांचक मुकाबलों के बाद विजेता प्रतिभागियों को मंच पर सम्मानित किया गया:

  • पुरस्कार वितरण: विभिन्न स्पर्धाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.
  • उपस्थित गणमान्य: पुरस्कार वितरण समारोह में विद्यालय के कोषाध्यक्ष भागवत प्रसाद मेहता, प्रधानाचार्य विद्यानंद मंडल, प्रभारी प्रधानाचार्य राजकुमार साह, वरिष्ठ आचार्य सूर्यकांत तथा धरनीधर मंडल समेत सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे.

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लेखक के बारे में

By सुदीप भारती

सुदीप भारती प्रिंट माध्यम में 12 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सिकटी (अररिया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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