MSME Policy 2026: बिहार की प्रस्तावित MSME नीति 2026 को लेकर अररिया से एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है. बिहार राज्य उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग के सदस्य आलोक कुमार भगत ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र भेजकर नीति में संशोधन और सीमांचल क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि गजट अधिसूचना से पहले इन सुझावों को शामिल किया जाता है तो अररिया समेत पूरे सीमांचल में निवेश, रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों को नई गति मिल सकती है.
अररिया को Region-A में शामिल करने की मांग
आलोक कुमार भगत ने पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा 'आकांक्षी जिला' घोषित किए जाने के बावजूद अररिया को MSME नीति 2026 के अनुलग्नक-I की जिला सूची में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने मांग की है कि अररिया को तत्काल Region-A में रखा जाए, ताकि यहां के उद्यमियों को नीति की धारा 7.9 के तहत पूंजीगत सब्सिडी और अन्य क्षेत्रीय प्रोत्साहन का लाभ मिल सके.
उनका कहना है कि इससे जिले में नए उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
सीमांचल के प्लाईवुड उद्योग को फिर से जीवित करने की मांग
पत्र में सीमांचल के कभी समृद्ध रहे प्लाईवुड उद्योग का भी उल्लेख किया गया है. आलोक कुमार भगत ने कहा कि प्रतिकूल नीतियों के कारण यह उद्योग धीरे-धीरे खत्म हो गया और इससे जुड़े हजारों रोजगार दूसरे राज्यों में चले गए.
उन्होंने मांग की कि प्लाईवुड उद्योग को High Priority Sector में शामिल किया जाए, ताकि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और कुशल श्रमिकों की वापसी के साथ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां फिर से शुरू हो सकें.
मखाना, मक्का और शहद के लिए एग्रो-लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर की मांग
पत्र में तीसरा महत्वपूर्ण सुझाव एग्रो-लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर को लेकर दिया गया है. उन्होंने कहा कि बिहार मखाना, मक्का और शहद के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, लेकिन पर्याप्त कोल्ड-चेन और भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता.
इसी को देखते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के ODOP मॉडल की तर्ज पर प्रस्तावित मेगा MSME पार्कों में कोल्ड स्टोरेज के लिए 35 प्रतिशत विशेष पूंजीगत सब्सिडी देने की मांग की है.
MSME Policy 2026:निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
आलोक कुमार भगत ने कहा कि यदि सरकार इन सुझावों को अंतिम अधिसूचना से पहले नीति में शामिल करती है तो सीमांचल क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, कृषि-आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
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