Araria Parthenium Awareness: अररिया में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की ओर से गाजर घास यानी पार्थेनियम के दुष्प्रभाव और नियंत्रण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया. केवीके वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि यह तेजी से फैलने वाला खतरनाक खरपतवार है, जो फसलों की पैदावार को 40 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकता है. इसके संपर्क में आने से मनुष्यों और पशुओं में एलर्जी, त्वचा रोग और सांस संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. किसानों से फूल और बीज बनने से पहले गाजर घास को नियंत्रित करने की अपील की गई.
खेतों में तेजी से फैलता है गाजर घास
कृषि विज्ञान केंद्र, अररिया के वैज्ञानिकों, कर्मियों और रावे के विद्यार्थियों ने अभियान में किसानों को गाजर घास के नुकसान की जानकारी दी. वैज्ञानिकों ने बताया कि पार्थेनियम खेतों, मेड़ों, खाली जमीन और सड़क किनारे तेजी से फैलता है. यह फसलों के विकास में बाधा डालने के साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है.
मनुष्य और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी असर
वैज्ञानिकों ने बताया कि गाजर घास के संपर्क में आने से मनुष्यों और पशुओं में एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक संपर्क रहने पर अस्थमा और सांस से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं. इसलिए खेतों और आसपास के क्षेत्रों में इसके प्रसार को रोकना जरूरी है.
फूल और बीज बनने से पहले करें नियंत्रण
केवीके वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि गाजर घास में फूल और बीज बनने से पहले ही इसे जड़ सहित उखाड़कर नियंत्रित किया जाए. उखाड़ी गई घास को खुले में फेंकने के बजाय गड्ढे में दबाने या वैज्ञानिक विधि से कम्पोस्ट तैयार कर नष्ट करने की सलाह दी गयी.
रासायनिक नियंत्रण की भी दी जानकारी
अभियान के दौरान वैज्ञानिकों ने गाजर घास के रासायनिक नियंत्रण के बारे में भी जानकारी दी. इसके लिए ग्लाइफोसेट सहित अनुशंसित खरपतवारनाशी के उपयोग की जानकारी किसानों को दी गई. वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि रसायनों का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिये.
गाजर घास मुक्त खेत का लिया संकल्प
Araria Parthenium Awareness: जागरूकता अभियान के दौरान किसानों और विद्यार्थियों ने खेत, मेड़ तथा सड़क किनारे गाजर घास को पनपने से रोकने का संकल्प लिया. केवीके की ओर से "गाजर घास मुक्त खेत - स्वच्छ पर्यावरण" का संदेश दिया गया.
