अररिया: कुर्साकांटा में विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ी नल-जल योजना, 13 पंचायतों के 172 वार्डों में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग

बिहार के कुर्साकांटा प्रखंड में 'हर घर नल का जल' योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई है. 13 पंचायतों के 172 वार्डों में सालों बाद भी शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सपना बनी हुई है. ग्रामीणों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है.

बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार 'हर घर नल का जल' योजना कुर्साकांटा प्रखंड में विभागीय उदासीनता और संवेदकों की मनमानी के कारण बदहाली के दौर से गुजर रही है. प्रखंड की 13 पंचायतों के कुल 172 वार्डों में वर्षों पूर्व योजना शुरू होने के बावजूद आज तक अधिकांश घरों तक शुद्ध पेयजल की नियमित आपूर्ति सपना बनी हुई है. कहीं पानी की टंकी का ढक्कन गायब है तो कहीं महीनों से पाइपलाइन फटी पड़ी है. रखरखाव के अभाव और पंप चालकों को मानदेय न मिलने से कई वार्डों में पखवाड़े भर जलापूर्ति ठप रहती है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है.

कागजों पर चालू, धरातल पर योजना बदहाल

प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है:

  • 13 पंचायतों का दायरा: प्रखंड की 13 पंचायतों में कुल 172 वार्ड हैं, लेकिन अधिकांश वार्डों में सुचारू जलापूर्ति नहीं हो पा रही है.
  • अधूरी पाइपलाइन व लीकेज: कई टोलों में आज तक पाइपलाइन बिछाई ही नहीं गई, जबकि जहां पाइप बिछी है, वहां लीकेज और टूटी पाइपों के कारण गंदा पानी जमा हो रहा है.
  • सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे: पानी की टंकियों की नियमित ब्लीचिंग व साफ-सफाई नहीं होती. कई टंकियों के ढक्कन टूटे होने से उसमें कचरा गिरता रहता है.
  • मानदेय संकट से ठप संचालन: पंप ऑपरेटरों को महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण वे संचालन बंद कर देते हैं, जिससे एक-एक पखवाड़े तक लोग पेयजल संकट झेलते हैं.

जनप्रतिनिधियों ने डीएम से की शिकायत, कार्रवाई की मांग

योजना में व्याप्त अनियमितता को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है:

  • प्रमुख मांगें: पूर्व उप प्रमुख विजय कुमार सिंह, इंदुभूषण मंडल, मुखिया प्रतिनिधि अरविंद मंडल और पंचायत समिति सदस्य (पंसस) देवेंद्र कुमार सिंह समेत कई प्रतिनिधियों ने जिला पदाधिकारी (DM) को आवेदन देकर टंकियों की नियमित सफाई कराने, वंचित वार्डों में पाइपलाइन बिछाने और व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है.
  • जवाबदेही तय करने की अपील: जनप्रतिनिधियों का कहना है कि संवेदक व विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ से सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.

कनीय अभियंता (PHED) का पक्ष

मामले पर पीएचईडी के कनीय अभियंता आदित्य कुमार ने बताया कि विभाग नल-जल योजना के कुशल संचालन को लेकर पूरी तरह गंभीर है. सभी तकनीकी गड़बड़ियों, पाइप लीकेज और मानदेय संबंधी समस्याओं को चिन्हित कर तेजी से सुधारा जा रहा है. जल्द ही सभी वार्डों में निर्बाध और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी.

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By Prabhat khabar news desk

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