अररिया जिले के कुर्साकांटा-कुआड़ी मार्ग स्थित 'मां तारा पेट्रोल पंप' (मरातीपुर) परिसर से बीते दिनों भारी मात्रा में बरामद किए गए सरकारी खाद्यान्न की कालाबाजारी के मामले में आखिरकार कुआड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. देर से ही सही, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है. हालांकि, एफआईआर में किसी को नामजद न कर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने से प्रशासनिक मंशा पर सवाल उठने लगे हैं.
MO के बयान पर अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज
कुआड़ी थाना में ब्लॉक आपूर्ति पदाधिकारी (MO) आदिल अली के लिखित आवेदन के आधार पर कांड संख्या 64/2026 के तहत अज्ञात तस्करों/कारोबारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है:
- छापेमारी में खाद्यान्न बरामद: गुप्त सूचना के आधार पर कुआड़ी पुलिस ने पेट्रोल पंप परिसर में छापेमारी कर सरकारी राशन के 15 बोरी चावल और 3 बोरी गेहूं की खेप जब्त की थी.
- हिरासत में लिए गए लोग छोड़े गए: कार्रवाई के दौरान कालाबाजारी के इस नेटवर्क में शामिल कुर्साकांटा निवासी एक व्यक्ति और एक टोटो (ई-रिक्शा) चालक को पुलिस ने हिरासत में लिया था. लेकिन गहन पूछताछ के बाद दोनों को पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया.
अधिकारियों का बयान
मामले की प्रगति पर संबंधित अधिकारियों ने अपनी बात रखी:
- एमओ आदिल अली: "मां तारा पेट्रोल पंप, मरातीपुर से जब्त खाद्यान्न मामले में जांचोपरांत अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है."
- प्रभारी थानाध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह: "बरामद सरकारी अनाज के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है. खाद्यान्न कहां से लाया गया था और इसकी आपूर्ति कहां होनी थी, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है."
गरीबों के निवाले पर डाका से लोगों में आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य सरकार गरीबों तक सस्ता और मुफ्त राशन पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन कालाबाजारी माफिया सरकारी अनाज पर खुलेआम डाका डाल रहे हैं.
रात के अंधेरे में खेल: "स्थानीय लोगों के अनुसार, जन वितरण प्रणाली (PDS) और सरकारी गोदामों से खाद्यान्न की ढुलाई दिन के उजाले के बजाय देर रात के अंधेरे में की जाती है, ताकि आसानी से कालाबाजारी की जा सके."
पेट्रोल पंप परिसर से अनाज मिलने के बाद अब क्षेत्र के लोगों की नजरें पुलिस और आपूर्ति विभाग की आगे की जांच पर टिकी हैं. देखना यह होगा कि मामले की तह तक जाकर असली माफियाओं के नामों का खुलासा होता है या फिर जांच महज फाइलों और 'अज्ञात' के नाम में दबकर रह जाएगी.
