जोगबनी स्टेशन रोड पर पसरा अंधेरा, 87 लाख के टेंडर के बाद भी नाले बजबजाए; वीआईपी दौरे के बाद 'पुनः मूषक भवः' हुई व्यवस्था

भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जोगबनी रेलवे स्टेशन और उसका मुख्य पहुंच मार्ग (स्टेशन रोड) इन दिनों विभागीय उदासीनता और ठेकेदार की मनमानी के कारण बदहाली के आंसू रो रहा है. पिछले पंद्रह दिनों से स्टेशन रोड की स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह गुल हैं, जिससे पूरा इलाका शाम ढलते ही मसान में तब्दील हो जाता है. वहीं, सफाई के नाम पर लाखों के टेंडर के बावजूद ड्रेनेज (नाला) चोक पड़ा हुआ है.

जीएम के जाते ही बुझ गईं लाइटें, अंधेरे में सफर करने को विवश रेल यात्री

स्थानीय नागरिकों और रेल यात्रियों के अनुसार, जोगबनी स्टेशन रोड की लाइटें पिछले कई महीनों से बंद पड़ी थीं. हाल ही में जब रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) का जोगबनी भ्रमण कार्यक्रम तय हुआ, तो आनन-फानन में रेल प्रशासन ने इन स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कराया था. परंतु, जीएम साहब का दौरा खत्म होते ही व्यवस्था ‘पुनः मूषक भवः’ (जैसे थे) की स्थिति में लौट आई है. पिछले दो सप्ताह से यह मुख्य मार्ग एक बार फिर पूरी तरह अंधेरे में डूबा हुआ है. रात के समय ट्रेन पकड़ने आने वाले यात्रियों, महिलाओं और बुजुर्गों को असामाजिक तत्वों का भय सताता रहता है और वे मोबाइल की टॉर्च जलाकर चलने को मजबूर हैं.

87 लाख का सफाई टेंडर, पर 32 की जगह महज 5-10 कर्मियों से हो रहा काम

स्टेशन परिसर और रेल कॉलोनियों में स्वच्छता की स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है. रेलवे ट्रैक और स्टेशन रोड के किनारे बने नालों की सफाई महीनों से नहीं हुई है, जिसके कारण वहां से उठने वाली तीव्र दुर्गंध ने स्थानीय दुकानदारों और यात्रियों का जीना मुहाल कर दिया है.

सफाई व्यवस्था में बड़े झोल का खुलासा:

  • लाखों का टेंडर: रेलवे द्वारा जोगबनी, फारबिसगंज, अररिया कोर्ट और पूर्णिया स्टेशन सहित आसपास के क्षेत्रों की संयुक्त साफ-सफाई के लिए कुल 87 लाख रुपये का भारी-भरकम टेंडर (ठेका) जारी किया गया है.
  • मैनपावर में भारी कटौती: नियमों के मुताबिक, ठेकेदार को जोगबनी स्टेशन पर प्रतिदिन 32 सफाई कर्मियों को ड्यूटी पर तैनात करना है. लेकिन, मुनाफे के चक्कर में ठेकेदार द्वारा ग्राउंड पर महज 5 से 10 सफाई कर्मियों के भरोसे ही पूरे स्टेशन का काम चलाया जा रहा है.
  • रेलवे कॉलोनी भी बदहाल: सफाई कर्मियों की घोर कमी के कारण रेल कर्मचारियों की अपनी कॉलोनी में भी कचरे का अंबार लगा हुआ है. इस बाबत रेलवे स्टाफ कई बार लिखित शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. यहाँ भी केवल बड़े अधिकारियों के निरीक्षण के दिन ही दिखावे के लिए नाले साफ किए जाते हैं.

जवाबदेही से बचते नजर आए जिम्मेदार: ‘मुझे ज्ञात ही नहीं है’

इस पूरे प्रशासनिक और नागरिक संकट को लेकर जब जोगबनी के स्टेशन प्रबंधक विमल कुमार से सीधी बात की गई, तो उनका रवैया बेहद टालमटोल वाला रहा. स्टेशन रोड की स्ट्रीट लाइटें पिछले 15 दिनों से बंद होने के सवाल पर उन्होंने अपनी अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी (ज्ञात) नहीं है. वहीं, जब उनसे 87 लाख रुपये के टेंडर के बावजूद 32 के बदले सिर्फ 5-10 कर्मियों से काम कराए जाने और गंदगी के साम्राज्य पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने संक्षिप्त पल्ला झाड़ते हुए कहा कि साफ-सफाई की इस लचर व्यवस्था को लेकर वे अपनी ओर से वरीय अधिकारियों (उच्च स्तर) को लिखित शिकायत भेज चुके हैं. अब देखना यह है कि रेल मंडल के उच्च अधिकारी इस खुले भ्रष्टाचार और यात्रियों की परेशानी पर कब तक संज्ञान लेते हैं, या फिर जोगबनी स्टेशन को अगले किसी बड़े अधिकारी के दौरे तक इसी तरह अंधेरे और गंदगी के साए में रहना पड़ेगा.

जोगबनी (अररिया) से समाचार ब्यूरो की रिपोर्ट:

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Published by: Divyanshu Prashant

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