अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
Jan Kalyan Shivir: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत अररिया जिले में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने और अंतिम पायदान के व्यक्ति को सशक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा 16 से 18 जून तक विशेष प्रखंड सहयोग-सह-जन कल्याण शिविर का आयोजन किया गया. इस तीन दिवसीय महा-अभियान के आखिरी दिन जिले के सभी नौ प्रखंड मुख्यालयों में प्रशासनिक मुस्तैदी चरम पर रही. शिविर का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस और कली-मजदूरों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना और ऑन-द-स्पॉट विधिक लाभ पहुंचाना रहा. इस दौरान जीविका दीदियों के लिए लगाए गए विशेष स्टॉल मुख्य आकर्षण का केंद्र बने रहे, जहां उनके वर्षों से लंबित मामलों का त्वरित निपटारा किया गया.
एक ही छत के नीचे मिल रहीं सभी विधिक सेवाएं; जीविका दीदियों में भारी उत्साह
इस कल्याणकारी शिविर और प्रशासनिक कड़ियों की मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं. शिविर के भीतर जीविका का एक बेहद मुस्तैद स्टॉल संधारित किया गया था, जहां स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न स्वरोजगार कड़ियों की लाइव जानकारी दी गई.
प्रखंड परियोजना प्रबंधकों (BPM), कनिष्ठ जीविका कर्मियों और कैडरों की सक्रिय भूमिका के कारण बैंकिंग लिंकेज, ऋण माफी और नए व्यापारिक इनपुट से जुड़ी विसंगतियों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया. लंबे समय से लंबित फाइलों के ऑन-द-स्पॉट निष्पादन से ग्रामीण महिलाओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया.
Jan Kalyan Shivir: पेंशन से लेकर आयुष्मान कार्ड तक का त्वरित संधारण; दफ्तरों की फजीहत से राहत
“जिला प्रशासन के अनुसार, इस जन कल्याण शिविर के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, नए राशन कार्ड के आवेदन, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड, कृषि इनपुट सब्सिडी, कौशल विकास और स्वरोजगार से संबंधित सभी मुख्य डिजिटल सेवाएं एक ही प्रांगण में मुस्तैद की गईं. इससे सुदूर देहात से आने वाले गरीब कली-मजदूरों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की फजीहत से स्थाई राहत मिली है.”
प्रशासन और जनता के बीच की दूरी हुई कम; आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
वरिष्ठ प्रशासनिक कप्तानों का मानना है कि इस तरह के लाइव शिविरों के संधारण से सरकार और आम जनता के बीच की दूरी काफी कम हो जाती है. योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन से बिचौलियों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो गया है.
ग्रामीण प्रक्षेत्र में इस त्रि-दिवसीय अभियान के सफल समापन के बाद प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे जिला प्रशासन की एक सार्थक और मानवीय पहल बताया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी कनिष्ठ स्तर पर ऐसे फीडबैक कैंप आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि जिले का हर गरीब परिवार आत्मनिर्भर बनकर मुख्यधारा से जुड़ सके.
