अररिया में मानिकपुर के 11 मजदूरों की जद्दोजहद,एक की मौत, एक लापता और पांच जिंदगी-मौत के बीच

Indore Fire Tragedy : कमाने गए थे सपनों के साथ, लौट आईं सिर्फ खबरें—किसी के घर सन्नाटा, किसी में उम्मीद की लौ

Indore Fire Tragedy : अरारिया के नरपतगंज से संजीव कुमार यादव की रिपोर्ट. मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड ने बिहार के अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड को झकझोर कर रख दिया है. मानिकपुर पंचायत से गए 11 मजदूरों में से एक की मौत हो चुकी है, एक अब भी लापता है और पांच मजदूर अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं. वहीं पांच मजदूर सुरक्षित घर लौट चुके हैं, जिससे गांव में मिली-जुली भावनाओं का माहौल बन गया है.

नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र के मानिकपुर पंचायत के अलग-अलग गांवों से 11 मजदूर करीब छह महीने पहले रोजगार की तलाश में इंदौर गए थे. सभी ने पटाखा फैक्ट्री में काम शुरू किया था, लेकिन अचानक हुए अग्निकांड ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया.

हादसे में एक की मौत, एक अब भी लापता

इस दर्दनाक हादसे में 25 वर्षीय धीरज कुमार, पिता बागी पासवान की मौत हो गई है. वहीं 24 वर्षीय बबलू कुमार, पिता सनेकी पासवान अब भी लापता हैं. परिजन लगातार उनकी तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है. घर में हर दिन उम्मीद और चिंता के बीच समय कट रहा है.

अस्पताल में पांच मजदूर गंभीर रूप से भर्ती

हादसे में घायल पांच मजदूरों का इलाज इंदौर के अस्पताल में जारी है. इनमें 26 वर्षीय अभिषेक कुमार, 20 वर्षीय पिंटू कुमार, 25 वर्षीय अजय कुमार, 25 वर्षीय लालटू कुमार और 50 वर्षीय रामवृक्ष पासवान शामिल हैं. सभी की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है.

पांच मजदूर लौटे घर, गांव में मिला-जुला माहौल

इस हादसे में पांच मजदूर सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं. उनके लौटने पर परिवारों में खुशी देखी गई, लेकिन गांव में समग्र रूप से गम और चिंता का माहौल बना हुआ है. एक ही गांव से गए युवकों के साथ हुई इस घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है.

परिजनों की बेचैनी और प्रशासन से उम्मीद

लापता मजदूर के परिजन लगातार खोजबीन में लगे हैं और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाएं प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि लापता मजदूर का जल्द पता चल सके और घायलों को बेहतर इलाज मिले.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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