बच्चे पढ़ेंगे, तो मजदूर नहीं मालिक बनेंगे, समाज का विकास होगा

मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने मदारगंज में इमाम अहमद रजा गर्ल्स कॉलेज का किया उद्घाटन

फारबिसगंज. प्रखंड क्षेत्र के सिमराहा थाना क्षेत्र के मदारगंज गांव में बने इमाम अहमद रजा गर्ल्स कॉलेज के उद्घाटन को लेकर कॉलेज के बानी व सरबराहे आला मुफ़्ती गुलाम अहमद रजा फरीदी ने कॉलेज परिसर में एक समारोह सह जलसा का आयोजन किया. समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अल्लामा व मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने कॉलेज का उद्घाटन किया. मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में इस्लामी स्कॉलर, फाजिले जामे अजहर मिश्र अल्लामा डॉ सैय्यद मंजरुल इस्लाम अजहरी साहब अमेरिका, मुफ़्ती जुबेर आलम सिद्दीकी निदेशक अरबिया कॉलेज पूर्णिया, समाजसेवी वाहिद अंसारी, इजहार अंसारी, कमालुद्दीन साहब, मो कफील, जाबिर अंसारी सहित अन्य उलेमा व गणमान्य लोग मौजूद थे. समारोह में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए बलियावी ने कहा कि ये बहुत बड़ी बात है कि मौत आदमी की होती है. मिशन की नहीं, मरता इंसान है मिशन नहीं. ये साबित कर दिखाया है मुफ़्ती गुलाम अहमद रजा फरीदी ने. वे अपने जमीन पर अपने परिवार के लोगों के सहयोग से बच्चियों के मजहबी व दुनियावी शिक्षा के लिए सिमराहा के मदारगंज गांव में गर्ल्स कॉलेज बना कर एक मिसाल पेश की. उन्होंने कहा कि अपने बच्चों व बच्चियों की शिक्षा पर ध्यान दें, जब बच्चे पढ़ेंगे तो मजदूर नहीं मालिक बनेंगे व समाज का विकास होगा. कहा कि बच्चों की सेहत पर मां के तरबियत का असर होता है. मां ही है जो बच्चों के नेचर व सोच को बदल देती है. कहा कि आज बड़ा बदलाव आया है बच्चियां आज नीट व यूपीएससी परीक्षाएं पास कर रही है. बच्चों के शिक्षा के लिए मस्जिदों के ईमाम ने जो जलसा व मिलाद से जो जागरूकता चलाया शिक्षा के क्षेत्र में जो बदलाव व जागरूकता आयी है. उसी का ये नतीजा है. बलियावी ने कहा कि मकान में ग्रेनाइड पत्थर से चमक लाते हैं. चमक तो ईमान की होनी चाहिए. एक जमाना था जब कच्चा फूस का घर होता था, कोई सुविधा नहीं थी. लेकिन सबसे कीमती व मजबूत चीज लोगों का ईमान था. उन्होंने कहा कि इस्लाम में अल्लाह के हकूक के साथ-साथ बंदे के हकूक का भी ख्याल रखने की ताकीद है. इसलिए अपने भाई बहनों आसपास के पड़ोसियों के हुकूक का ख्याल रखेंगे.

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