घरेलू गैस किल्लत ने बढ़ायी मुश्किल, शहर से अब अपने गांव लौटने लगे लोग

छात्रों की पढ़ाई ठप, कारोबार पर ताला

गैस सिलिंडर की गंभीर संकट से जूझ रहा है अररिया

पंकज झा, अररिया : जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों घरेलू गैस सिलिंडर की भारी किल्लत ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. खासकर दूर-दराज इलाकों से आकर शहर में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र, छोटे व्यवसायी, दिहाड़ी मजदूर व गिग वर्कर इस संकट की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं. हालांकि जिला प्रशासन जिले में गैस सिलिंडर का प्रर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने का दावा कर रहा है. उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्चित कराने व इसके कमी से जुड़ी किसी तरह के अफवाह व कालाबाजारी पर प्रभावी रोक को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सजग व मुस्तैद है. लेकिन प्रशासन की यही मुस्तैदी कई लोगों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है. रसोई गैस की अनुपलब्धता ने कई लोगों के समक्ष रोजमर्रा का जीवन चलाना मुश्किल कर दिया है. स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई छात्र अपने ट्यूशन व कोचिंग छोड़कर मजबूरी में अपने गांव लौटने लगे हैं.

शहर में पढ़ाई भी मुश्किल

शहर में रहकर पढ़ाई करने का सपना अब गैस सिलिंडर की कमी के कारण टूटता नजर आ रहा है. छात्रों का कहना है कि बिना गैस के खाना बनाना असंभव हो गया है. बाहर खाने का खर्च उनके बजट से बाहर है. ऐसे में उनके पास घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. वहीं, सड़क किनारे ठेला-कुलचा लगाकर चाय, नाश्ता का दुकान व अन्य छोटे-मोटे खाद्य पदार्थ बेचने वाले लोगों के लिये भी यह संकट बेहद भयावह साबित हो रहा है. गैस सिलिंडर के बिना उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप पड़ गया है. इन छोटे व्यवसायियों की रोज की कमाई पर ही उनका व उनके परिवार का जीवन निर्भर करता है. अब जब काम ही बंद हो गया है. तो तो उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. शहर में रहकर सुरक्षा गार्ड, दैनिक मजदूर व गिग वर्कर के रूप में काम करने वाले लोग भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं. गैस की कमी के कारण उन्हें या तो महंगे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं या फिर कई बार बिना भोजन के ही गुजारा करना पड़ रहा है. इससे उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है व काम करने की क्षमता घट रही है. इस संकट का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि लोग अब अपने रोजी-रोजगार को छोड़कर वापस गांव की ओर पलायन करने लगे हैं. इससे न केवल शहर की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है.

लोगों में दिख रही हताशा व निराशा

स्थानीय प्रशासन व संबंधित विभागों की ओर से अब तक इस समस्या के समाधान के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाये जाने से लोगों में हताशा व निराशा व्याप्त है. गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं. पहले जहां लोग चार किलो का सिलिंडर भराकर अपने दैनिक जरूरत व व्यवसाय के लिए इसका इस्तेमाल करते थे. प्रशासनिक सख्ती की वजह से अब काई भी दुकानदार छोटे सिलिंडर में गैस भरने के लिये तैयार नहीं होते. चोरी छिपे ऐसा करने वाले लोगों से मुंह मांगी कीमत वसूल रहे हैं. ऐसे में जरूरतमंद लोगों के लिए प्रशासनिक स्तर से कोई वैकल्पिक इंतजाम किये जाने की मांग भी तेज हो गयी है. घरेलू गैस सिलिंडर की यह किल्लत अब केवल एक सुविधा का अभाव नहीं रह गयी है. बल्कि यह एक सामाजिक व आर्थिक संकट का रूप लेने लगा है. इसका त्वरित समाधान जरूरी है.

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