अररिया. बिहार में किसानों तक उर्वरक की बिक्री और वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है. कृषि निदेशालय, बिहार, पटना के संयुक्त निदेशक शस्य उत्पादन ब्रज किशोर ने पत्रांक 1331 (उपा-17), दिनांक 24 अगस्त 2026 के माध्यम से Framework for Fertilizer Sale Application System, FSAS के सफल क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. नए डिजिटल सिस्टम के लागू होने के बाद उर्वरक खरीद की प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ा जाएगा और किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा.
1 सितंबर से 19 जिलों में शुरू होगा FSAS, अररिया भी शामिल
कृषि निदेशालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार FSAS को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. इसका पायलट प्रोजेक्ट सबसे पहले वैशाली और शेखपुरा में चलाया गया था. इसके बाद प्रथम चरण में पांच जिलों में इसका सफल प्रयोग किया गया. अब दूसरे चरण में राज्य के 19 जिलों में इसे लागू करने की तैयारी है. दूसरे चरण में पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सारण, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और भागलपुर को शामिल किया गया है. इन जिलों में 1 सितंबर 2026 से FSAS के प्रस्तावित संचालन की तैयारी की जा रही है.
क्या है FSAS, कैसे बदलेगी किसानों की खाद खरीद व्यवस्था
भारत सरकार के उर्वरक विभाग तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से संयुक्त रूप से Framework for Fertilizer Sale Application System विकसित किया जा रहा है. इसके तहत FSAS ऐप तैयार किया गया है. यह प्रणाली IFMS और AgriStack के एकीकरण के माध्यम से किसानों द्वारा उर्वरकों की खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगी. डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरक बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों तक खाद की उपलब्धता को बेहतर तरीके से सुनिश्चित करना है. सिस्टम के माध्यम से उर्वरक बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है.
25 अगस्त से शुरू होगा प्रशिक्षण, तकनीकी विशेषज्ञ देंगे जानकारी
FSAS के सफल क्रियान्वयन के लिए 25 अगस्त 2026 से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा. मुख्यालय स्तर पर तकनीकी परामर्शी की ओर से संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को सिस्टम के संचालन और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी.
निर्देश में जिलों के स्तर पर मास्टर ट्रेनर नामित करने को कहा गया है. इसके बाद मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से संबंधित कर्मियों और उर्वरक विक्रेताओं को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा. इससे 1 सितंबर से प्रस्तावित व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने में मदद मिलेगी.
खुदरा खाद विक्रेताओं को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
नई व्यवस्था को सिर्फ सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं रखा गया है. उर्वरक के खुदरा विक्रेताओं को भी FSAS से संबंधित प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया है. इसके लिए NFL के सहयोग से खुदरा विक्रेताओं को प्रशिक्षित करने की बात कही गई है. खाद की बिक्री प्रक्रिया में खुदरा विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ऐसे में नई डिजिटल प्रणाली की जानकारी उन्हें पहले से उपलब्ध कराना जरूरी माना जा रहा है, ताकि किसानों को खाद खरीदने के दौरान तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े.
LGD कोड से लेकर Farmer Registry तक पर जोर
निर्देश में जिलों को कई महत्वपूर्ण तैयारियां पूरी करने को कहा गया है. इनमें LGD कोड को IFMS पर अपलोड करना भी शामिल है. इसके अलावा Farmer Registry को शत-प्रतिशत पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया है.Farmer Registry और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को अपडेट रखने का उद्देश्य किसानों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करना है. इससे नई व्यवस्था के तहत किसानों की पहचान और उर्वरक खरीद से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
हेल्प डेस्क और कंट्रोल रूम की भी होगी व्यवस्था
FSAS लागू होने के दौरान किसानों और उर्वरक विक्रेताओं को तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए हेल्प डेस्क और कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश भी दिया गया है. इससे सिस्टम से जुड़ी समस्याओं की जानकारी समय पर प्राप्त की जा सकेगी और उनके समाधान की प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा.
इसके साथ ही उर्वरक दुकानों पर इस्तेमाल होने वाली POS मशीनों को भी अपडेट कराने का निर्देश दिया गया है. डिजिटल सिस्टम के सफल संचालन में POS मशीनों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
पारदर्शिता बढ़ने और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
राज्य सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों को खाद की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को कम करना है. डिजिटल सिस्टम के माध्यम से बिक्री प्रक्रिया को व्यवस्थित करने से उर्वरक वितरण की निगरानी बेहतर होने की उम्मीद है. अररिया समेत दूसरे चरण में शामिल 19 जिलों में अब विभागीय स्तर पर तैयारियां तेज करनी होंगी. 25 अगस्त से प्रशिक्षण और तकनीकी तैयारी के बाद 1 सितंबर से FSAS लागू करने का प्रस्ताव है. आने वाले समय में इस डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को खाद खरीद में अधिक सुगम और पारदर्शी व्यवस्था मिलने की उम्मीद है.
