सुबह से शाम तक उमड़ रही खरीदारों की भीड़, बाजारों में बढ़ी रौनक
त्योहार के मद्देनजर फारबिसगंज शहर के मध्य स्थित प्रसिद्ध फैंसी मार्केट सहित बथनाहा और सिमराहा जैसे प्रमुख ग्रामीण साप्ताहिक हाटों में सुबह से लेकर देर शाम तक खरीदारों का हुजूम उमड़ रहा है. कुर्बानी के लिए बाजार में विभिन्न नस्लों, कद-काठी और आकर्षक आकारों के बकरे बिक्री के लिए लाए जा रहे हैं. इस बार बाजार का मिजाज काफी सकारात्मक है. खरीदार अपनी जेब और पसंद के अनुसार बकरों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं. अमूमन बाजारों में बकरों की कीमत 12 हजार रुपये से शुरू होकर 60 हजार रुपये तक देखी जा रही है. खास बात यह है कि लोग अल्लाह की राह में कुर्बानी के लिए पूरी तरह स्वस्थ और सुंदर बकरे को तरजीह दे रहे हैं और इसके लिए बड़ी कीमतें चुकाने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं. बकरों को लेकर बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह और कौतूहल देखा जा रहा है.
फैंसी मार्केट में ‘बट्टी’ के नाम पर अवैध वसूली, नगर परिषद प्रशासन मौन
बाजार की इस रौनक के बीच एक स्याह पहलू भी सामने आया है, जो स्थानीय स्तर पर भारी चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है. शहर के फैंसी मार्केट में बकरा खरीदने और बेचने आने वाले सीधे-साधे ग्रामीणों और व्यापारियों से कुछ स्थानीय रसूखदार लोगों द्वारा ‘बट्टी’ (बाजार टैक्स/कमीशन) के नाम पर कथित रूप से अवैध रूप से रुपये वसूले जा रहे हैं.
क्या है पूरा मामला और नियम?
- नियम के विरुद्ध वसूली: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि नगर परिषद (नप) प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष केवल फैंसी मार्केट के सब्जी मंडी क्षेत्र का ही खुली डाक (टेंडर) के माध्यम से एक वर्ष के लिए अस्थायी बंदोबस्ती की जाती है. सर्वाधिक बोली लगाने वाला ठेकेदार केवल तय सीमा में ही तहबाजारी या बट्टी वसूल सकता है.
- बिना डाक के वसूली का खेल: लोगों का आरोप है कि फैंसी मार्केट स्थित एशियन गेस्ट हाउस के ठीक सामने वाले खाली परिसर का आज तक नगर परिषद द्वारा कोई टेंडर या डाक नहीं कराया गया है. इसके बावजूद, इस खाली मैदान में बकरीद के मद्देनजर लगने वाली अस्थाई बकरा मंडी में आने वाले लोगों से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जबरन अवैध वसूली की जा रही है.
आम जनता के बीच बना चर्चा का विषय, कार्रवाई की मांग
व्यापारियों का कहना है कि दूर-दराज से आने वाले गरीब किसानों को डरा-धमका कर बट्टी के नाम पर मोटी रकम ऐंठी जा रही है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मुख्य शहर के बीचो-बीच चल रहे इस अवैध खेल की भनक होने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन और स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है. इस उदासीनता को लेकर आम जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और मुख्य पार्षद से मांग की है कि इस अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए और संलिप्त तत्वों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि त्योहार के सीजन में लोगों को परेशानी न हो.
फारबिसगंज (अररिया) से मोहम्मद कलीम उद्दीन की रिपोर्ट:
