अररिया में कुर्साकांटा मॉडल हाई स्कूल का कन्या छात्रावास बना शोपीस, एक दशक बाद भी नहीं शुरू हुई व्यवस्था

Araria News: अररिता में छात्राओं के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया कन्या छात्रावास आज भी वीरान पड़ा है. शौचालय बना, भवन बना, लेकिन एक टंकी नहीं बनने से पूरा छात्रावास वर्षों से बेकार पड़ा हुआ है.

Araria News: कुर्साकांटा अररिया से दिलीप कुमार सिंह की रिपोर्ट. मॉडल हाई स्कूल कुर्साकांटा में छात्राओं की आवासीय सुविधा के लिए वर्षों पहले बनाया गया कन्या छात्रावास आज भी शुरू नहीं हो सका है. लाखों रुपये की लागत से बने इस भवन का उद्देश्य कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राओं को कक्षा आठ के बाद आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी छात्रावास सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर खड़ा है.

छात्रावास बना, लेकिन मूलभूत सुविधा अधूरी

प्रखंड मुख्यालय स्थित मध्य विद्यालय परिसर में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए मॉडल हाई स्कूल में नामांकन के साथ छात्रावास सुविधा देने की योजना थी. इसी उद्देश्य से कन्या छात्रावास का निर्माण कराया गया. भवन और शौचालय तो तैयार हो गये, लेकिन पानी की टंकी नहीं बनने के कारण शौचालय उपयोग लायक नहीं हो सका.

टंकी नहीं बनने से बेकार पड़ा भवन

स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद छात्रावास आज तक चालू नहीं हो पाया. शौचालय निर्माण के बाद भी पानी की व्यवस्था नहीं होने से पूरा भवन अनुपयोगी बन गया. लोग इसे संवेदक की लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता का परिणाम बता रहे हैं.

प्रधानाध्यापक ने विभाग को लिखा पत्र

विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजीव कुमार ने बताया कि छात्रावास संचालन, पानी की टंकी निर्माण और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर विभाग को कई बार पत्र भेजा गया है. हालांकि अब तक विभाग की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है.

डीईओ ने जांच और कार्रवाई की कही बात

मामले को लेकर संजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली है. उन्होंने बताया कि भवन निर्माण विभाग से जानकारी प्राप्त कर छात्रावास को संचालित कराने की दिशा में कार्रवाई की जायेगी.

छात्राओं को अब भी इंतजार

स्थानीय अभिभावकों और छात्राओं का कहना है कि अगर छात्रावास शुरू हो जाये तो दूर-दराज गांवों की बेटियों को पढ़ाई में काफी सुविधा मिलेगी. फिलहाल वर्षों से तैयार भवन के बावजूद छात्राएं आवासीय सुविधा से वंचित हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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