Araria News: सावन के पवित्र महीने में शिवभक्ति का रंग अब फारबिसगंज में भी पूरी तरह चढ़ गया है. फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र के मझुआ गांव से बड़ी संख्या में कांवरियों का जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए रवाना हुआ, जिससे पूरा इलाका “बोल-बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा. भगवा वस्त्रों में सजे श्रद्धालुओं के उत्साह, भक्ति गीतों और जयकारों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया.
जत्थे के रवाना होने से पहले श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की और बाबा बैद्यनाथ के दर्शन तथा जलाभिषेक के लिए मंगलमय यात्रा की प्रार्थना की.
विधायक मनोज विश्वास ने किया जत्थे का नेतृत्व
देवघर के लिए रवाना हुए कांवरियों के इस जत्थे का नेतृत्व फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास ने किया. उन्होंने श्रद्धालुओं को सावन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान शिव की आराधना का यह महीना विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है.
विधायक ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करने की परंपरा वर्षों पुरानी है और यह क्षेत्र की आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है. उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सफल यात्रा की कामना करते हुए क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की.
मझुआ से निकले कांवरियों ने बनाया भक्तिमय माहौल
जैसे ही कांवरिया जत्था मझुआ से आगे बढ़ा, आसपास के क्षेत्रों में भी उत्साह का माहौल बन गया. श्रद्धालु “बोल-बम”, “हर-हर महादेव” और बाबा बैद्यनाथ के जयकारे लगाते हुए पूरे जोश के साथ देवघर की ओर रवाना हुए.
भक्ति गीतों की धुन और शिवनाम के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंजता रहा. स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं.
सावन में बढ़ रही है देवघर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
सावन के दौरान बिहार और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकलते हैं. फारबिसगंज के मझुआ से निकला यह जत्था भी उसी परंपरा का हिस्सा है, जिसने पूरे क्षेत्र में शिवभक्ति का वातावरण बना दिया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सावन के प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर कांवरियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे धार्मिक उत्साह और भी बढ़ गया है.
Araria News: आस्था और परंपरा का जीवंत दृश्य
मझुआ से देवघर के लिए रवाना हुआ यह कांवरिया जत्था केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामूहिक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक भी है. श्रद्धालुओं के जयकारों और भक्ति गीतों ने फारबिसगंज को पूरी तरह शिवमय बना दिया.
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