जिले में मिशन मोड पर बन रहा किसानों का 'फार्मर आईडी', 60 फीसदी काम पूरा; जमाबंदी और दस्तावेजों में अंतर से आ रही अड़चन

अररिया जिले में किसानों के लिए 'फार्मर आईडी' बनाने का अभियान तेज हो गया है, जिसमें 60% काम पूरा हो चुका है. पीएम किसान योजना का लाभ जारी रखने के लिए यह आईडी अनिवार्य है. हालांकि, जमाबंदी और नामों की स्पेलिंग में अंतर जैसी बाधाएं आ रही हैं, जिन्हें दूर करने की अपील की गई है.

अररिया जिले में किसानों के लिए विशिष्ट डिजिटल पहचान यानी फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने का कार्य कृषि विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा मिशन मोड में चलाया जा रहा है. योजना का उद्देश्य शत-प्रतिशत पात्र किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है. जिले में कुल 3 लाख 28 हजार 187 पंजीकृत किसान हैं, जिनमें से अब तक लगभग 60 प्रतिशत यानी 1.96 लाख किसानों का फार्मर आईडी कार्ड बनकर तैयार हो चुका है.

पीएम किसान योजना के लिए फार्मर आईडी हुआ अनिवार्य

केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) योजना का लाभ जारी रखने के लिए अब फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया गया है. पहले यह अनिवार्यता नहीं थी, लेकिन अब बिना फार्मर आईडी के सरकारी कृषि योजनाओं की राशि सीधे खाते में भेजना संभव नहीं होगा.

कार्ड निर्माण में किसानों के सामने आ रही हैं ये मुख्य बाधाएं

अभियान तेज होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर किसानों को फार्मर आईडी बनवाने में कई व्यावहारिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है:

  • दादा-पिता के नाम जमाबंदी: अरविंद पासवान, महेंद्र नाथ झा, राधेश्याम चौधरी समेत कई किसानों का कहना है कि उनके पास कृषि योग्य भूमि तो है, लेकिन जमाबंदी आज भी उनके पिता या दादा के नाम पर ही दर्ज है. पारिवारिक बंटवारा और दाखिल-खारिज (नामांतरण) पूरा न होने के कारण उनके कार्ड नहीं बन पा रहे हैं.
  • नामों में स्पेलिंग का अंतर: किसान पंजीकरण (Registration) और भूमि जमाबंदी रिकॉर्ड में दर्ज नामों की स्पेलिंग व लिखावट में अंतर होने के कारण सिस्टम द्वारा आवेदन खारिज हो रहे हैं.
  • विकल्प की मांग: किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से प्रक्रिया को थोड़ा सरल बनाने की मांग की है, ताकि कोई भी वास्तविक और पात्र किसान योजना से वंचित न रहे.

क्या है फार्मर आईडी और क्या हैं इसके फायदे?

फार्मर आईडी किसानों की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान (Digital Identity) है. इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  • एकीकृत डेटा: इसमें किसान के भूमि रिकॉर्ड, बोई गई फसलों का विवरण और अन्य जरूरी दस्तावेज एक जगह उपलब्ध रहते हैं.
  • योजनाओं में पारदर्शिता: फसल बीमा, कृषि ऋण, बीज-उर्वरक सब्सिडी और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से वास्तविक किसानों तक पहुंचेगा.
  • फर्जीवाड़े पर रोक: फर्जी रजिस्ट्रेशन और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म होगी.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Pankaj jha

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >