विवाद . सफाई कर्मियों की हड़ताल से दबाव में आया नगर परिषद
सफाई कर्मियों की हड़ताल के आगे अंतत: नगर परिषद को झुकना पड़ा और नगर परिषद को एजेंसी का एकरारनामा रद्द करना पड़ा. लेिकन सफाई कर्मी अभी भी एकरारनामे की जांच और एजेंसी पर प्राथमिकी करने की मांग पर अड़े हुए हैं.
अररिया : दस दिनों से चली आ रही सफाई कर्मियों की हड़ताल को लेकर नगर परिषद ने शहर की सफाई के लिए लगाये गये एजेंसी मनोकामना का एकरारनामा रद्द कर दिया है. अब नगर परिषद खुद ही शहर की सफाई की कमान संभालेगा. यह जानकारी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी भवेश कुमार ने दी. उन्होंने बताया कि सफाई कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद शहर में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कार्यरत एजेंसी मनोकामना को एक सप्ताह का समय दिया गया था.
लेकिन उनके द्वारा निर्धारित अवधि में शहर की सफाई की व्यवस्था नहीं की जा सकी. नगर परिषद एजेंसी के एकरारनामा को रद्द करते हुए अब सोमवार से शहर की सफाई खुद करायेगा. सफाई कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद उनके समर्थन में आये भाकपा नेता डॉ एसआर झा व अररिया विधायक आबिदुर्ररहमान ने भी इसे गंभीरता से लिया था व कार्यपालक पदाधिकारी से बात की थी.
15 जून से सफाई कर्मी हैं हड़ताल पर
सफाई कर्मियों की मजदूरी भुगतान में एजेंसी द्वारा अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाते हुए सफाई कर्मी 15 जून से ही हड़ताल पर हैं. उनका आरोप था कि विगत एक वर्ष से एजेंसी द्वारा उनकी मजदूरी में कटौती की जा रही है. सफाई कर्मियों ने इसे बकाया राशि मानते हुए उसके भुगतान की मांग की थी. साथ ही एजेंसी द्वारा सफाई कर्मियों की पारिश्रमिक के रूप में जो राशि भुगतान ली जाती है उसी दर पर भुगतान करने की मांग की जा रही है. हालांकि नगर परिषद द्वारा एजेंसी के एकरारनामा को रद्द कर इस मामले पर विराम लगाने का प्रयास किया गया है. लेकिन सफाई कर्मियों के रुख को देखते हुए मामला निबटता नहीं दिख रहा है.
सफाई कर्मी एजेंसी के विरुद्ध जांच करने व उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग पर अड़े हुए हैं.
एकरारनामा को सार्वजनिक करे नप : भाकपा नेता
सफाई कर्मी की हड़ताल को नैतिक समर्थन दे रहे भाकपा नेता डॉ एसआर झा ने बताया कि जब तक नगर परिषद व एजेंसी के बीच हुए एकरारनामे को सार्वजनिक नहीं किया जाता और इसकी पूरी जांच नहीं हो जाती है तब तक सफाई कर्मियों के काम पर लौटने का सवाल ही नहीं उठता.
उन्होंने कहा कि सिर्फ एकरारनामा को निरस्त कर दिये जाने से नगर परिषद अपना पीछा नहीं छुड़ा सकती. मजदूरों की हकमारी हुई है, इसलिए मनोकामना एजेंसी के विरुद्ध प्राथमिकी की कार्रवाई भी की जानी चाहिए. अगर नप प्राथमिकी दर्ज कराने में विलंब करेगा तो सफाई कर्मियों के द्वारा मनोकामना के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा करायी जायेगी.
