व्यावहारिक व सामूहिक पहल की जरूरत, अपने बच्चों से करें शुरुआत

अररिया : जाने-माने कहानीकार श्री नूरी ने कहा कि हमें आम बोल चाल में उर्दू के सरल शब्दों का इस्तेमाल करनी चाहिए. ये ध्यान देना चाहिए कि बच्चे उर्दू पढ़ें-लिखें. एक हद तक उन्हें उर्दू भाषा का ज्ञान होना ही चाहिए. केवल सरकार के भरोसे उर्दू का विकास नहीं हो सकता है. उर्दू भाषियों को […]

अररिया : जाने-माने कहानीकार श्री नूरी ने कहा कि हमें आम बोल चाल में उर्दू के सरल शब्दों का इस्तेमाल करनी चाहिए. ये ध्यान देना चाहिए कि बच्चे उर्दू पढ़ें-लिखें. एक हद तक उन्हें उर्दू भाषा का ज्ञान होना ही चाहिए. केवल सरकार के भरोसे उर्दू का विकास नहीं हो सकता है.

उर्दू भाषियों को ही पहल करनी होगी. नेम प्लेट से लेकर निमंत्रण पत्र उर्दू में भी छपावना चाहिए. वहीं सेमिनार के अध्यक्ष व सेवानिवृत्त एडीजे जुबैरूल हसन गाफिल ने कहा कि उर्दू के विकास के लिए जरूरी है कि बच्चों की बुनियादी तालीम उर्दू में हो.
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मकतबों की स्थापना की जाये. उन्होंने ये भी कहा कि शिक्षा व उर्दू के विकास के लिए तालीमी जमात का गठन भी होना चाहिए. जो गांव गांव जा कर लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित करें. इस अवसर पर दोनों की वक्ताओं ने उर्दू भाषियों से आह्वान किया कि वे उर्दू अखबार व पत्र पत्रिकाएं खरीद कर पढ़ें.
जबकि सेमीनार के विशिष्ट अतिथि जोकीहाट के विधायक शाहनवाज आलम ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्था को बधाई देते हुए कहा कि उर्दू जीने कस सलीका सिखाता है. पर उर्दू के विकास के लिए स्वयं को जागरूक करना होगा. उर्दू की प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान देना होगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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