पक्का आवास की चाह में तोड़ा अपना घर आज दूसरे के घर में रहने को हैं विवश

अररिया : सबके लिए आवास योजना का नगर परिषद क्षेत्र में बुरा हाल है. यह परिस्थिति विगत एक वर्ष की नहीं है बल्कि पिछले तीन वर्षों से ही एचएफए योजना के लाभुक घर उजाड़ कर द्वितीय व तृतीय किस्त की बांट जोह रहे हैं. पहले तो राशि का आवंटन बड़ी बाधा बनी रही. फिर जब […]

अररिया : सबके लिए आवास योजना का नगर परिषद क्षेत्र में बुरा हाल है. यह परिस्थिति विगत एक वर्ष की नहीं है बल्कि पिछले तीन वर्षों से ही एचएफए योजना के लाभुक घर उजाड़ कर द्वितीय व तृतीय किस्त की बांट जोह रहे हैं. पहले तो राशि का आवंटन बड़ी बाधा बनी रही. फिर जब राशि मिली तो आचार संहिता के कारण लाभुकों तक उनकी राशि नहीं मिल पायी है. इस वर्ष 15 मार्च 2018 को नगर विकास विभाग ने इस योजना के लिए एक करोड़ का आवंटन अररिया नगर परिषद को उपलब्ध कराया. लेकिन यह राशि ऊंट के मूंह में जीरा का फोरन साबित हुआ. हालांकि इसी बीच नगर परिषद को लगभग 17 करोड़ का आवंटन पुन: प्राप्त हुआ.

लेकिन उक्त राशि को तृतीय फेज का बताकर उलझनें बढ़ती गयी. बहरहाल उक्त राशि को अब सामंजन कर पुन: प्रथम व दूसरे फेज के लाभुकों के खाते में भेजे जाने की सहमति तो बन गयी है. लेकिन यह सहमति तब बनी जब बारिश का मौसम सर पर है. जिन लोगों ने प्रथम किस्त मिलते ही अपना घर उजाड़ कर घर की आधारशिला रख दी उन्हें अब दूसरी व तृतीय किस्त की राशि का इंतजार करने के लिए नप की तरफ टकटकी लगाये रहना पड़ा है. इन दो वर्षों के दरम्यान ऐसे परिवार अपना घर तोड़कर या तो दूसरे के घर में शरण लिये हुए हैं या फिर प्लास्टिक का छत बनाकर किसी प्रकार अपना गुजारा कर रहे हैं.

जिनके पास अपनी जमीन नहीं, नप मांग रहा है उनसे वंशावली : नगर परिषद के कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीसरे फेज के लाभुकों को कार्यादेश मिलने की बात हो या फिर प्रथम व द्वितीय चरण के लाभुकों के किस्तों के भुगतान का मामला हो इन सब के पीछे कोई-कोई कारण जरूर है. अन्य कारणों के अलावा एक कारण लाभुक के नाम से खुद का भुमि स्वामित्व नहीं होना भी है. बताया कि ऐसे लाभुकों को अब वंशावली बनाकर नप कार्यालय में जमा करना होगा. जिसके सत्यापन के पश्चात उन्हें उनके किस्त की राशि भेज दी जायेगी.
अविलंब किया जायेगा राशि का हस्तांतरण : इधर इस संबंध में पूछे जाने पर मुख्य पार्षद रितेश कुमार राय ने बताया कि नप में एचएफए योजना मद में लगभग 17 करोड़ की राशि उपलब्ध है. कागजी प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात लाभुकों के प्रथम, द्वितीय या तृतीय किस्त की राशि खाते में हस्तांतरित कर दी जायेगी. उन्होंने इस बात की पुष्टि भी की कि जिन लाभुकों के नाम से खुद की जमीन नहीं है उन्हें अपने आवास निर्माण में उपयोग होने वाले जमीन की वंशावली बनाकर देनी होगी. उन्होंने कहा कि इस सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के पश्चात जल्द ही तीसरे फेज के लाभुकों को कार्यादेश वितरित किये जाने का सिलसिला शुरू कर दिया जायेगा.
खास बातें
दो फेज में 1913 लाभुकों को मिला कार्यादेश, मात्र 56 लाभुकों को ही मिल पायी है तीसरी किस्त
दो फेज के 1913 लाभुकों में से 959 लाभुकों को ही मिल पायी प्रथम किस्त
दो फेज के 1913 लाभुकों में से 553 लाभुकों को ही मिल पायी द्वितीय किस्त
दो फेज के 1913 लाभुकों में से 56 लाभुकों को ही मिल पायी तीसरा किस्त
तृतीय फेज के 2598 लाभुकों को आवास हुआ स्वीकृत, लेकिन अब तक उन्हें नहीं मिल पाया है कार्यादेश
तीसरे फेज के 2598 लाभुकों को नहीं
मिल पाया है अब तक कार्यादेश
तीन फेज में 4511 लाभुकों का हुआ है चयन
एचएफए योजना के तहत तीन फेज में विभिन्न वित्तीय वर्ष में अब तक 4511 लाभुकों का चयन हुआ है. इनमें से प्रथम फेज में 215, द्वितीय फेज में 1698 व तृतीय फेज में 2598 लाभुकों के नामों की स्वीकृति मिली है. लेकिन इनमें से तृतीय फेज के 2598 लाभुकों में से एक भी लाभुकों को कार्यादेश तक नहीं वितरित किया जा सका है. वहीं प्रथम फेज के 215 लाभुकों में से 196 लाभुकों को प्रथम किस्त, 167 लाभुकों को द्वितीय किस्त व 34 लाभुकों को तृतीय किस्त मिली है. दूसरे फेज के 1698 लाभुकों में से 763 को प्रथम किस्त, 386 को द्वितीय किस्त व 22 लाभुकों को तृतीय किस्त के रूप में दो-दो लाख रुपये की राशि प्रति लाभुक दी गयी है. दु:खद तो यह है कि इन दो फेज के 1857 लाभुकों का आवास आज भी राशि की प्रतिक्षा में अपूर्ण है. जिनमें से अधिकांश लाभुकों या तो दूसरे के घर में या फिर बांस की टाट या प्लास्टिक के छत के नीचे गुजरने करने को विवश हैं. इन लाभुकों के दर्द को समझ पाना मुश्किल है.

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