अररिया : रोजगार के अवसर व कथित रूप से बढ़ती बेरोजगारी को लेकर देश भर में आये दिन होने वाली चर्चाओं की असलियत चाहे जो भी हो. पर जिले की स्थिति तो यही है कि कर्मचारियों की भारी कमी के बीच की विकास योजनाओं को जमीन पर तारने की जद्दोजेहद में अधिकारी लगे हुए है. रिक्तियों का आलम ये है कि पंचायत सचिवों के 50 व राजस्व कर्मचारियों के 75 प्रतिशत पद पर बरसों से बहाली की राह तक रहे हैं. संबंधित कार्यालयों व जिला स्थापना प्रशाखा से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 218 पंचायतों में एक एक पंचायत सचिव होने चाहिए. पर पदस्थापित केवल 95 हैं.
राजस्व कर्मचारियों का तो और भी जबर्दस्त टोटा है. पुराने सृजित पदों की संख्या 91 है. जबकि अब कुल 218 पद सृजित हो चुके हैं. वहीं पदस्थापित कर्मचारियों की कुल संख्या केवल 40 के आस पास है. बताया जाता है कि एक एक राजस्व कर्मचारी के पास दो से चार हल्का का प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है. वहीं प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारियों के नौ में से आठ पद खाली पड़े हैं. एक मात्र बीपीआरओ भोला राय अररिया प्रखंड में पदस्थापित हैं. वहीं अंचल अमीन के रिक्त पद के आंकड़े तो हैरान करने वाले हैं. मिली जानकारी के अनुसार अंचल अमीन के पुराने स्वीकृत पदों की संख्या 48 है. पर कार्यरत केवल दो हैं. इसके अलावा तीन अमीन संविदा पर बहाल हैं. दी गयी जानकारी के अनुसार जिले मे जन सेवक के कुल 160 पद स्वीकृत हैं. कार्यरत केवल नौ हैं. चालकों के 16 पदों में केवल चार भरे गये हें. बाकी रिक्त हैं. लिपिक वर्ग का हाल भी कमोबेश ऐसा ही है. बताया गया कि लिपिकों के कुल 194 पद है. 55 पद रिक्त है. वहीं बताया जाता है कि जिला स्वास्थ्य विभाग में भी चिकित्सकों व कर्मियों की खासी कमी है. डाक्टरों के करीब एक चौथाई पद रिक्त है. सदर अस्पताल में न तो कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ है. न ही महिला चिकित्सक. वहीं एएनएम की कमी को लेकर भी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वालद दिक्कतों की चर्चा आम बात हो गयी है.
