पटना: बुधवार की शाम 7.15 बजे थे. रिटायर्ड आइएएस अफसर वशीमुद्दीन अंजुम के मोबाइल की घंटी बजी. हैलो.. एसएसपी बोल रहा हूं. अंजुम साहब! मुबारक हो, अब आपकी पोती मेरी गोद में महफूज है. आप बिल्कुल चिंता न करें हम उसे लेकर आपके आवास पर आ रहे हैं. खबर मिलते ही मासूम ताहिरा के दादा अंजुम साहब कुरसी से उठ खड़े हुए. पिछले दिन-रात से खामोशी ओढ़े चेहरे पर रौनक और रंगत छा गयी, ताहिरा की दादी राजिया खातून को आवाज लगाये, अरे सुन रहीं हैं, मिल गयीं मेरी बच्ची, वह आ रही है. एसएसपी साहब लेकर आ रहे हैं.
सन्नाटे और उदासी में डूबे अंजुम साहब के घर में बच्ची के आने की खबर गूंजी तो घर का कोना पकड़ कर बैठी महिलाएं, पुरुष और नात-रिश्तेदार खुशी से उछल पड़े. ताहिरा की दादी और अम्मी की आंसूओं से भरे आंखों के पोर छलक उठे. दोनों हाथों से आसूओं को पोछते हुए वह घर वसे बाहर की तरफ निकलीं और एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया. खामोशी टूटने लगी, घर के दर-वो-दीवार, चौखट के फीके पड़े रंग अब चटक हो गये थे. खबर मुहल्ले और दूर के रिश्तेदारों में फैली, तो अंजुम साहब का मोबाइल फोन पल-पल बजने लगा.
अपहर्ता सिर्फ देते थे चॉकलेट
मासूम ताहिरा को अपहर्ता सिर्फ चॉकलेट देते थे. उसे न तो दूध मिला था और न ही अन्न का एक तिनका. वह लगातार दादा-दादी के लिए रोती थी. अपहर्ता उसे फटकार लगाते और वह सिसकने लगती. 36 घंटे दहशत के साये में गुजरने के बाद जब वह एसएसपी के पास पहुंची, तो उसे प्यास लगी थी. सबसे पहले उसने पानी मांगा. एसएसपी ने तत्काल पानी की व्यवस्था की. उसने खूब पानी पिया. सहमी ताहिरा थोड़ी-थोड़ी देर पर एसएसपी को आपबीती सुनाती रही. ताहिरा की बरामदगी के बाद बुधवार की शाम एसएसपी मनु महराज कंकड़बाग स्थित साईं मंदिर माथा टेकने पहुंचे थे. पूरे विधि-विधान से पूजा -अर्चना की. इधर, पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित रिटायर्ड आइएएस वशीमुद्दीन अंजुम के आवास पर उनकी पोती ताहिरा के पहुंचने के बाद खुशियां छा गयीं. ताहिरा के दादा जी ने मिठाई बंटवायी.
दूरभाष पर करीबियों ने जाना हाल
7.40 बजे थे. अंजुम साहब मोबाइल पर एक रिश्तेदार से मुखातिब थे. बोले, अरे भाई साहब, खुदा क मेहरबानी है, जब से यह मनहूस वारदात हुई है, खाना-पीना हराम हो गया था. ताहिरा की दादी और अम्मी का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था. दिल बैठ रहा था, बढ़ते वक्त के साथ मन बेचैन हो रहा था, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाय, लेकिन जब से एसएसपी साहब का फोन आया है, दिल को बड़ी तसल्ली मिली है. सब लोग बहुत खुश हैं. फोन पर बधाई मिली और फोन कट गया.
दरवाजे पर टिकी रहीं लोगों की नजरें
धीरे-धीरे आवास पर भीड़ बढ़ने लगी. कार, ऑटो, बाइक से रिश्तेदार घर पर पहुंचने लगे. ताहिरा को लेकर आ रहे एसएसपी का रास्ता देखने के लोग आवास के गेट पर ही जमे हुए थे. जब कोई बरामदे में पहुंचकर बधाई देता, घर की महिलाएं सीढ़ी तक आ जाती. लोगों के आने-जाने का सिलसिला करीब दो घंटे तक चला.
गोद में लेकर गाड़ी से उतरे एसएसपी
ठीक 8.58 बजे थे. रंगदारी सेल की पुलिस टीम आवास पर जमी थी. एसएसपी के गाड़ी लाइट दिखायी पड़ी तो चहल कदमी शुरू हो गयी. माहौल में आवाज गूंज उठा, आ गयी, मुन्नी आ गयी, बिटिया आ गयी. गेट पर भारी हुजूम ताहिरा को देखने के लिए उमड़ पड़ा. एसएसपी की गाड़ी खड़ी हुई. दरवाजा खुला तो ताहिरा को गोद में लिए एसएसपी मुस्कुराते हुए उतरे. मीडिया उनकी तरफ मुखातिब हुआ और सवालों की बौछार शुरू हो गयी. एक साथ सभी घर के बरामदे में पहुंचे.
तो माथा चूम कर गले में समेटा
एसएसपी ने ताहिरा को उसकी दादी की गोद में सौंप दिया. उन्होंने माथा चूमकर गले में समेट लिया. आंखों से आंसू छलक उठे. अम्मी ने पहले पुचकारा और फिर चेहरे पर हाथ फेरा. ताहिरा सहमी सी गोद में चिपकी रही. अंजुम साहब सबसे गले मिल रहे थे. पुलिस को बधाई मिल रही थी. पुलिस के लौटने के बाद भी बधाइयों का सिलसिला देर रात तक चलता रहा.
