Suryakumar Yadav: भारतीय टी20 टीम को वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव को इसके तुरंत बाद टीम से बाहर किया जाना क्रिकेट फैंस के साथ-साथ खुद उनके लिए भी चौंकाने वाला था. अब लंबे समय बाद सूर्यकुमार ने इस फैसले पर खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि टीम में अपना नाम नहीं देखकर उनके मन में क्या चल रहा था और किस तरह वह करीब डेढ़ महीने तक इस फैसले के बारे में सोचते रहे.
टीम में नाम नहीं देखकर भी शांत थे SKY
पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान सूर्यकुमार यादव(SKY) ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि टीम में उनका नाम नहीं है, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया काफी शांत थी. उन्होंने चयनकर्ताओं के नजरिए से इस फैसले को समझने की कोशिश की. सूर्यकुमार ने कहा कि उनके करियर में जब भी मुश्किल परिस्थितियां आईं या चीजें उनके मुताबिक नहीं हुईं, उन्होंने खुद को शांत रखने की कोशिश की. इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया.
उन्होंने बताया कि 2026 में उन्हें लग रहा था कि वह अगले दो साल तक टीम को आगे ले जाएंगे. इस दौरान ओलंपिक और एक और टी20 वर्ल्ड कप जैसी बड़ी चुनौतियां सामने थीं. हालांकि, उनका मानना था कि किसी फैसले को लेकर उनकी सोच और चयनकर्ताओं की सोच अलग हो सकती है. सूर्यकुमार ने कहा कि अगर चयनकर्ताओं को लगा कि टीम के भविष्य के लिए किसी और के नेतृत्व में आगे बढ़ना बेहतर है, तो उन्हें उस फैसले का सम्मान करना चाहिए.
'दो साल में एक भी सीरीज नहीं हारे, फिर बदलाव क्यों?'
शुरुआत में सूर्यकुमार ने खुद को समझा लिया था, लेकिन बाद में उनके मन में यह सवाल बार-बार आने लगा कि आखिर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी. उन्होंने माना कि इस फैसले से वह निराश हुए थे. उनके मुताबिक, जब उनकी कप्तानी में टीम लगातार सीरीज जीत रही थी और वर्ल्ड कप तथा एशिया कप जैसे बड़े खिताब हासिल कर चुकी थी, तो उनके मन में यही सवाल आता रहा कि जब सबकुछ अच्छा चल रहा था तो बदलाव क्यों किया गया. सूर्यकुमार ने बताया कि वह करीब डेढ़ महीने तक घर पर रहे और इस दौरान लगातार इसी बारे में सोचते रहे.
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अय्यर की कप्तानी पर नहीं कोई शिकायत
सूर्यकुमार यादव ने यह भी साफ किया कि उन्हें श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाए जाने से कोई शिकायत नहीं थी. उन्होंने कहा कि वह श्रेयस के साथ काफी क्रिकेट खेल चुके हैं और उन्हें एक अच्छा खिलाड़ी, अच्छा इंसान और अच्छा कप्तान मानते हैं. उनकी परेशानी श्रेयस को कप्तान बनाए जाने से नहीं, बल्कि खुद को टीम से बाहर किए जाने के फैसले से थी. सूर्यकुमार सिर्फ यह समझना चाहते थे कि जब टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, तब बदलाव की जरूरत क्यों महसूस हुई.
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टीम चयन से पहले चयनकर्ताओं ने किया था फोन
सूर्यकुमार ने बातचीत में यह भी खुलासा किया कि टीम की घोषणा से करीब दो-तीन दिन पहले चयन समिति की ओर से उन्हें फोन किया गया था. उन्हें बताया गया कि आगामी सीरीज के लिए टीम में उनका नाम नहीं होगा और अब टीम को आगे बढ़ाने का समय आ गया है.
सूर्यकुमार ने कहा कि उन्होंने इस फैसले पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी. उनके मुताबिक, चयनकर्ताओं ने जो फैसला लिया, उन्हें लगा होगा कि वह टीम के भविष्य के लिए बेहतर है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर टीम किसी और के नेतृत्व में आगे बढ़कर अच्छा प्रदर्शन करती है, तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी.
कप्तानी शानदार, लेकिन बल्लेबाजी फॉर्म बनी वजह
सूर्यकुमार यादव के मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास यही रहा कि कप्तान के तौर पर उनका प्रदर्शन शानदार था, लेकिन बल्लेबाज के रूप में उनकी फॉर्म को लेकर सवाल उठ रहे थे. चयन समिति ने भी सूर्यकुमार को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी पिछले दो साल की बल्लेबाजी फॉर्म को अहम कारणों में शामिल किया था. साथ ही चयनकर्ताओं ने अगले दो साल के टीम चक्र और भविष्य को ध्यान में रखने की बात कही थी.
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